मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार को सदन की कार्यवाही के दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने मुख्य सचिव राजेश कुमार को 30 मिनट के अंदर विधानसभा में उपस्थित होने का भी निर्देश दिया। नार्वेकर ने साफ कहा कि विधानसभा अधिकारियों की सुविधा के हिसाब से नहीं चलेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में अगर ऐसी लापरवाही दोबारा हुई तो पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी जाएगी।
तुरंत अधिकारियों की दीर्घा में पहुंचे राजेश कुमार
विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर राज्य के मुख्य सचिव और सबसे वरिष्ठ नौकरशाह राजेश कुमार विधानसभा में अधिकारियों की दीर्घा में पहुंचे। विधानसभा में चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने शिकायत की थी कि संबंधित मंत्री और विभागों के वरिष्ठ नौकरशाह अधिकारी दीर्घा में मौजूद नहीं हैं, जिसके बाद राहुल नार्वेकर ने यह चेतावनी जारी की।
कांग्रेस ने की कार्यवाही स्थगित करने की मांग
कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता विजय वडेट्टीवार ने मंत्रियों और सचिवों की गैरमौजूदगी को विधानसभा, अध्यक्ष और महाराष्ट्र की जनता का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि जब तक मंत्री और सचिव सदन में उपस्थित नहीं होते, तब तक कार्यवाही स्थगित कर दी जाए। नार्वेकर ने हंगामे के बीच गहरी चिंता जताते हुए कहा कि विपक्षी सदस्यों की ओर से बार-बार शिकायत मिल रही है कि चर्चा का जवाब देने के लिए संबंधित मंत्री मौजूद नहीं हैं और वरिष्ठ अधिकारी भी अनुपस्थित हैं। उन्होंने मुख्य सचिव को आधे घंटे के भीतर विधानसभा में उपस्थित होने का निर्देश दिया और साथ ही कहा कि जब भी किसी विभाग से जुड़ा विषय चर्चा के लिए आए, तो संबंधित मंत्री अपनी मौजूदगी सुनिश्चित करें।
सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित
विपक्ष के विरोध के बाद सदन की कार्यवाही लगभग 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर मुख्य सचिव विधानसभा पहुंचे। सरकार की ओर से जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि कुछ मंत्री और वरिष्ठ नौकरशाह सरकारी बैठकों सहित अन्य आधिकारिक कार्यों में व्यस्त थे, जिसके कारण वे सदन में उपस्थित नहीं हो सके।
नार्वेकर ने दी चेतावनी
नार्वेकर ने सरकार को ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होने की चेतावनी दी और कहा कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा, "सरकार से वेतन लेने वाले सचिवों की संख्या 110 है, लेकिन उनमें से चार भी मौजूद नहीं हैं। विधानसभा की कार्यवाही से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं हो सकता।"
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