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I-T विभाग ने 490 करोड़ रुपए का कर न चुकाने वाले 24 बिजनेसमैन के नाम किए सार्वजनिक, सबसे ज्‍यादा हैं अहमदाबाद और कोलकाता से

 Edited By: Abhishek Shrivastava
 Published : Mar 29, 2018 04:42 pm IST,  Updated : Mar 29, 2018 04:42 pm IST

आयकर विभाग ने कर नहीं चुकाने वाले ऐेसे 24 व्यक्तियों और इकाइयों के नाम सार्वजनिक किए हैं जो या तो फरार हैं या जिन्होंने धन संपत्ति के अभाव में कर चुका पाने में असमर्थता प्रकट की है।

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नई दिल्‍ली। आयकर विभाग ने कर नहीं चुकाने वाले ऐेसे 24 व्यक्तियों और इकाइयों के नाम सार्वजनिक किए हैं जो या तो फरार हैं या जिन्होंने धन संपत्ति के अभाव में कर चुका पाने में असमर्थता प्रकट की है। इन पर लगभग 490 करोड़ रुपए का कर बकाया है। विभाग ने चूककर्ताओं को लज्जित करने की नीति के तहत प्रमुख राष्ट्रीय अखबारों में विज्ञापन देकर उनके नाम सार्वजनिक किए हैं। दिल्ली में प्रधान आयकर महानिदेशक की तरफ से प्रकाशित नोटिस में उनको तत्काल बकाया कर के भुगतान की सलाह दी गई है। 

इस सार्वजनिक घोषणा में कंपनी या व्यक्ति की पहचान, कंपनी के निदेशकों और उनके भागीदार, कंपनी के गठन की तारीख (व्यक्तियों के संदर्भ में जन्म तिथि), उनके स्थायी खाता संख्या या कर कटौती खाता संख्या(टैन), उनके रिकॉर्ड में दर्ज पते, बकाया कर, आकलन वर्ष तथा संबंधित आयकर प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र का जिक्र किया गया है। 

ये चूककर्ता कंपनियां खाद्य प्रसंस्करण, सर्राफा कारोबार, सॉफ्टवेयर, रियल एस्टेट और इंगट निर्माण आदि से जुड़ी हैं। सर्वाधिक 86.27 करोड़ रुपए का बकाया दिल्ली की कंपनी मेसर्स स्टॉक गुरु और उसके भागीदार लोकेश्वर देव पर है। नोटिस में कहा गया है कि चूककर्ता का कोई पता नहीं है और कर भुगतान के लिए संपत्ति भी अपर्याप्त है। 

इन कंपनियों पर बकाया आकलन वर्ष 2009-10 और 2010-11 के हैं। सूची में शामिल कुछ चूककर्ताओं ने आकलन वर्ष 1989-90 के लिए कर का भुगतान नहीं किया। कोलकाता के अर्जुन सोनकर के ऊपर 51.37 करोड़ रुपए का बकाया है और उसका भी कोई पता नहीं है। उसके बाद कोलकाता के ही किशन शर्मा का नाम है जिनपर 47.52 करोड़ रुपए का बकाया है। 

कुल 24 इकाइयों पर कर बकाया है। ये इकाइयां अहमदाबाद, गुवाहाटी, विजयवाड़ा, नासिक, सूरत, दिल्ली, वडोदर, कोलकाता तथा अन्य शहरों से हैं। इन सभी पर कुल मिलाकर 490 करोड़ रुपए का कर बकाया है। आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सार्वजनिक सूची का मकसद लोगों को इस बारे में जानकारी देना है ताकि अगर उनके पास कोई सूचना है तो वे इन चूककर्ताओं को पकड़ने में विभाग की मदद कर सकें। 

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