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ई-कॉमर्स कंपनियों पर बढ़ेगी निगरानी, खुदरा व्यापार नियमों का हो सख्ती से पालन

 Written By: Surbhi Jain
 Published : May 16, 2016 01:00 pm IST,  Updated : May 16, 2016 01:00 pm IST

RAI ने ई-कॉमर्स के लिए प्लेटफार्म उपलब्ध करने वाली कंपनियों पर सख्त निगरानी की मांग की है ताकि ये बाजार प्लेटफार्म खुद खुदरा कारोबार नहीं कर सकें।

ई-कॉमर्स कंपनियों पर बढ़ेगी निगरानी, खुदरा व्यापार नियमों का हो सख्ती से पालन- India TV Hindi
ई-कॉमर्स कंपनियों पर बढ़ेगी निगरानी, खुदरा व्यापार नियमों का हो सख्ती से पालन

नई दिल्ली: स्टोर बना कर खुदरा कारोबार करने वाली इकाइयों के मंच रिटेलर्स एसोसिसेयसन ऑफ इंडिया (RAI) ने ऑनलाइन खुदरा कारोबार (ई-कॉमर्स) के लिए प्लेटफार्म उपलब्ध करने वाली कंपनियों पर सख्त निगरानी की मांग की है ताकि ये बाजार प्लेटफार्म खुद खुदरा कारोबार नहीं कर सकें।

एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन बाजार प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली कंपनियां देश में भारी भरकम रियायत देकर बाजार बिगाड़ती रही हैं और इसके मद्दे नजर इस बारे में औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (DIPP) द्वारा घोषित नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए।

आरएआई के सीईओ कुमार राजगोपालन ने कहा, ऑनलाइन मार्किटप्लेस के तौर पर काम करने वाली कंपनियां प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी-निवेश (FDI) भी प्राप्त कर रही हैं और खुदरा व्यापार भी कर रही हैं। ये कंपनियां अपना मालगोदाम बनाकर खुद दाम तय कर रही हैं। भारी रियायत पर माल बेच रही हैं लेकिन उन उत्पादों के विनिर्माता का नाम नहीं बतातीं हैं। सरकार को इसकी जांच करनी चाहिये। कंपनियों को माल बेचने का मंच उपलब्ध कराने वाली ई-कामर्स कंपनियों को सीधे खुदरा कारोबार करने की अनुमति नहीं होनी चाहिये।

आरएआई बिल देकर काम करने वाले छोटे बड़े खुदरा कारोबारियों का प्रतिनिधित्व करता है। उसका दावा है कि उसके साथ लाखों कारोबारी जुड़े हैं जिसमें गठन ने कहा है कि खुदरा स्टोरों की श्रृंखला चलाने वाली बड़ी कंपनियां भी संगठन भी शामिल हैं। संगठन ने कहा है कि डीआईपीपी द्वारा तय नियमों का अनुपालन हो सरकार को इस पर भी गौर करना चाहिये।

औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने मार्च में एक सर्कुलर जारी कर मार्किट प्लेस कंपनियों के नियम स्पष्ट किये थे। विभाग के मुताबिक इस तरह की मार्किटप्लेस कंपनियां अपनी कुल बिक्री में किसी एक कंपनी अथवा समूह के उत्पादों का 25 प्रतिशत से ज्यादा माल नहीं बेच सकतीं हैं। कंपनियां प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी सामान के दाम को प्रभावित नहीं कर सकती हैं। देश में ऑनलाइन खुदरा कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील जैसी मार्किटप्लेस कंपनियों के प्लेटफार्म पर कारोबार तेजी से बढा है हालांकि, समय समय पर इन कंपनियों पर भारी छूट के साथ माल की बिक्री कर बाजार बिगाड़ने का आरोप लगता रहा है।

देश में एकल ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है जबकि बहुब्रांड खुदरा कारोबार में 51 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है लेकिन इस क्षेत्र में आगे अनुमति का फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है।

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