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अब EPFO में नहीं चलेगी लापरवाही! सरकार ने लागू किए नए सोशल सिक्योरिटी नियम, PF क्लेम के लिए सख्त डेडलाइन तय

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Jul 02, 2026 02:07 pm IST,  Updated : Jul 02, 2026 02:07 pm IST

केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत EPFO से जुड़े नए नियम लागू कर दिए हैं। नए नियमों का मकसद पीएफ, पेंशन और बीमा से जुड़े दावों का तेजी से निपटारा करना और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाना है।

सरकार ने जारी किए EPFO के...- India TV Hindi
सरकार ने जारी किए EPFO के नए नियम Image Source : ANI

अगर आप नौकरी करते हैं और आपका EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) कटता है, तो यह खबर आपके लिए काफी जरूरी है। केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत EPFO से जुड़े नए नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों का मकसद पीएफ, पेंशन और बीमा से जुड़े दावों का तेजी से निपटारा करना और पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाना है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब PF क्लेम 20 दिनों के भीतर निपटाना होगा। बिना उचित कारण के देरी होने पर संबंधित अधिकारी पर 12% सालाना की दर से पेनल इंटरेस्ट लगाया जा सकता है।

EPFO की नई स्कीमों का नोटिफिकेशन जारी

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने Employees' Provident Funds Scheme 2026, Employees Pension Scheme 2026 और Employees Deposit-Linked Insurance (EDLI) Scheme 2026 को अधिसूचित कर दिया है। ये नई योजनाएं अब तक लागू 1952, 1971, 1995 और 1976 की पुरानी योजनाओं की जगह लेंगी। इनका उद्देश्य EPFO के सिस्टम को नए सोशल सिक्योरिटी कोड के अनुरूप बनाना है।

PF क्लेम में देरी पर होगी सख्त कार्रवाई

नई व्यवस्था के तहत यदि कोई पीएफ निकासी, पेंशन या बीमा से जुड़ा दावा सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा होने के बावजूद 20 दिनों के भीतर निपटाया नहीं जाता, तो संबंधित EPFO अधिकारी जवाबदेह होगा। ऐसे मामलों में अधिकारी पर 12 प्रतिशत सालाना की दर से पेनल इंटरेस्ट लगाया जा सकता है, जिसे उसके वेतन से वसूला जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे क्लेम प्रोसेस में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

कर्मचारियों के योगदान में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने साफ किया है कि नए नियमों के बावजूद PF में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के योगदान में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कर्मचारी पहले की तरह अपनी बेसिक सैलरी का 12% पीएफ में जमा करेंगे। नियोक्ता भी 12% योगदान जारी रखेंगे। नियोक्ता के हिस्से में से 8.33% राशि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाएगी। वहीं केंद्र सरकार पेंशन फंड में 1.16% का अपना योगदान जारी रखेगी। यानी कर्मचारियों के वेतन से कटने वाली राशि या योगदान की व्यवस्था पहले जैसी ही रहेगी।

अब डिजिटल होगी पूरी प्रक्रिया

सरकार का सबसे बड़ा फोकस डिजिटल कंप्लायंस पर है। नए नियमों के तहत EPFO से जुड़े सभी संस्थानों और EPF ट्रस्टों को ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। सदस्य अब ऑनलाइन माध्यम से क्लेम दाखिल कर सकेंगे, आवेदन की स्थिति देख सकेंगे और कई सेवाओं का लाभ बिना कार्यालय के चक्कर लगाए ले सकेंगे। इससे न सिर्फ प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि कागजी कार्रवाई भी कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?

नए नियम लागू होने के बाद कर्मचारियों को कई बड़े फायदे मिलने की उम्मीद है। पीएफ, पेंशन और बीमा क्लेम का निपटारा पहले से तेज होगा, अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी, ऑनलाइन सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और अनावश्यक देरी की संभावना कम होगी। साथ ही, डिजिटल सिस्टम मजबूत होने से कर्मचारियों को अपने दावों की जानकारी और सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी।

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