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16 अप्रैल 1853 को भारत में हुई थी रेल की शुरुआत, 173 साल में स्टीम इंजन से बुलेट ट्रेन की ओर बढ़ रहा भारतीय रेल

 Published : Apr 16, 2026 06:55 pm IST,  Updated : Apr 16, 2026 07:46 pm IST

डेढ़ सदी से भी अधिक समय से, भारतीय रेल ने बदलती आवश्यकताओं, प्रौद्योगिकियों और उम्मीदों के साथ तालमेल बिठाते हुए निरंतर खुद को ढाला है। चाहे वह स्टीम इंजनों और प्रारंभिक इंजीनियरिंग आविष्कारों का दौर हो, या फिर विद्युतीकृत नेटवर्क, आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास का समय।

भारत में, इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर रूपांतरण 1925 में शुरू हुआ, जब देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन बॉम्- India TV Hindi
भारत में, इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर रूपांतरण 1925 में शुरू हुआ, जब देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन बॉम्बे विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला हार्बर के बीच संचालित हुई। Image Source : PIB ANI / INDIA TV

भारतीय रेल ने डेढ़ सदी से अधिक (173 साल) की अपनी यात्रा में समय के साथ लगातार खुद को बदला और विकसित किया है। एक साधारण भाप इंजन आधारित सेवा से शुरू होकर यह आज एक विशाल, आधुनिक और तकनीक-संचालित परिवहन नेटवर्क बन चुका है, जो हर दिन लाखों यात्रियों और भारी मात्रा में माल की आवाजाही को सुगमता से संभालता है। बदलती तकनीक, बढ़ती मांग और आधुनिक जरूरतों के साथ तालमेल बिठाते हुए रेलवे ने न केवल अपनी क्षमता बढ़ाई है, बल्कि देश के आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ के रूप में अपनी भूमिका को भी और मजबूत किया है। आइए, रेलवे के सफर से जुड़ी खास बातों पर यहां चर्चा करते हैं। 

जब पटरी पर दौड़ी थी भारत की पहली रेल

भारत में रेलवे की शुरुआत 16 अप्रैल 1853 को हुई, जब पहली यात्री ट्रेन बॉम्बे (अब मुंबई) से ठाणे के बीच चलाई गई। यह ऐतिहासिक दिन इतना महत्वपूर्ण माना गया कि बॉम्बे में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया, ताकि लोग इस नए परिवहन माध्यम के उद्घाटन के साक्षी बन सकें। बोरीबंदर स्टेशन (वर्तमान छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस क्षेत्र) पर उस समय भारी भीड़ जुटी थी। इस पहली ट्रेन में करीब 400 यात्री सवार हुए थे। ट्रेन में ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR) के 14 यात्री डिब्बे शामिल थे, जिसे ‘फॉकलैंड’ नामक भाप इंजन ने खींचा था।

इस ऐतिहासिक अवसर पर 21 तोपों की सलामी दी गई, जो भारत में रेल परिवहन की शुरुआत का प्रतीक बनी। ट्रेन ने लगभग 34–35 किलोमीटर की दूरी तय कर अपनी पहली सफल यात्रा पूरी की और यात्री परिवहन में रेलवे की व्यावहारिक उपयोगिता को साबित किया। इस घटना ने भारतीय रेलवे प्रणाली की नींव रखी और देश में रेल नेटवर्क के तेज विस्तार की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त किया।

16 अप्रैल 1853 को, पहली यात्री ट्रेन बोरी बंदर (बंबई) और ठाणे के बीच चली, जिसकी दूरी 34 किलोमीटर थी।
Image Source : GOOGLE ART AND CULTURE16 अप्रैल 1853 को, पहली यात्री ट्रेन बोरी बंदर (बंबई) और ठाणे के बीच चली, जिसकी दूरी 34 किलोमीटर थी।

गेज के आधार पर भारत में रेल ट्रैक की कैटेगरी

  • सबसे अधिक उपयोग होने वाला ब्रॉड गेज होता है, जिसकी चौड़ाई 1.6 मीटर होती है। इसके अलावा मीटर गेज ट्रैक 1 मीटर चौड़े होते हैं।
  • छोटी लाइनों के लिए नैरो गेज का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी चौड़ाई 0.76 मीटर और 0.6 मीटर होती है।
  • वहीं अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक, स्टैंडर्ड गेज ट्रैक की चौड़ाई 1.43 मीटर होती है।

दो रेल पटरियों के बीच की आंतरिक दूरी को गेज कहा जाता है, जो रेलवे ट्रैक की चौड़ाई को दर्शाती है। भारत में शुरुआती रेलवे लाइनों के लिए 5 फीट 6 इंच (लगभग 1.6 मीटर) चौड़े ब्रॉड गेज का उपयोग किया गया था। इसके बाद 1871 में मीटर गेज को आधिकारिक रूप से देश में दूसरे मानक गेज के रूप में अपनाया गया।

भारतीय रेलवे का विद्युतीकरण

पिछले एक दशक में भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण की गति में उल्लेखनीय तेजी आई है। वर्ष 2014 से पहले देश के लगभग 20 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क का ही विद्युतीकरण हुआ था, जिससे परिचालन दक्षता सीमित थी और डीजल ईंधन पर निर्भरता अधिक बनी हुई थी। आज स्थिति काफी बदल चुकी है। कुल 70,142 ब्रॉड गेज रूट किलोमीटर में से लगभग 99.6 प्रतिशत नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। मार्च 2026 तक 69,873 रूट किलोमीटर (RKM) का विद्युतीकरण किया जा चुका है, जबकि वर्ष 2014 में यह आंकड़ा मात्र 21,801 RKM था।

इस बदलाव ने देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। रेलवे विद्युतीकरण से 2024-25 में लगभग 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता में कमी आई है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन को डीजल की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत अधिक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है। इस बदलाव से लगभग 6,000 करोड़ रुपये की बचत भी हुई है और डीजल की खपत में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

मॉडर्न और हाइटेक ट्रेनों के दौर में पहुंचा भारत

आधुनिक ट्रेन सेवाओं के विस्तार के जरिए भारतीय रेल ने यात्रियों की पहुंच और यात्रा अनुभव को लगातार बेहतर बनाया है। इस दिशा में वंदे भारत नेटवर्क, अमृत भारत एक्सप्रेस और हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

वंदे भारत नेटवर्क

भारतीय रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस के लॉन्च और विस्तार के जरिए रेल यात्रा को नई पहचान दी है। यह भारत की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन है, जिसे फरवरी 2019 में शुरू किया गया था। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत शुरू की गई यह सेवा आधुनिक, आरामदायक और तकनीक-आधारित रेल यात्रा की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जाती है। वित्त वर्ष 2025-26 में वंदे भारत एक्सप्रेस नेटवर्क पर लगभग 3.98 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। शुरुआत से अब तक यह ट्रेन करीब 1 लाख यात्राओं के माध्यम से 9.1 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा दे चुकी है। वहीं, जनवरी 2026 में शुरू हुई वंदे भारत स्लीपर सेवा ने भी तेजी से स्वीकार्यता हासिल की है। इसके शुरुआती तीन महीनों में 119 यात्राओं के दौरान 1.21 लाख यात्रियों ने इस सेवा का लाभ उठाया।

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन।
Image Source : VANDE BHARAT INDIAN RAILWAY X IMAGEवंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन।

अमृत भारत एक्सप्रेस
निम्न और मध्यम आय वर्ग के यात्रियों को किफायती और आधुनिक रेल सुविधा देने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने अमृत भारत एक्सप्रेस शुरू की है। यह नई पीढ़ी की गैर-वातानुकूलित आधुनिक ट्रेनें हैं, जिन्हें कम लागत में बेहतर आराम और सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इन ट्रेनों में 11 जनरल कोच, 8 स्लीपर कोच, 1 पेंट्री कार और 2 लगेज-कम-दिव्यांगजन कोच शामिल हैं, जो विभिन्न यात्रियों की जरूरतों को पूरा करते हैं। 18 मार्च 2026 तक देशभर में कुल 60 अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाएं संचालित की जा रही हैं।

भारत में हाई-स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन की जोरदार तैयारी
केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे के लिए 2,78,000 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड पूंजीगत परिव्यय निर्धारित किया गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है। यह रेलवे विकास को दी गई रणनीतिक प्राथमिकता को दर्शाता है। इस योजना के तहत देश में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य प्रमुख शहरों और क्षेत्रों को जोड़कर तेज और कुशल आवागमन को बढ़ावा देना है। प्रस्तावित मार्गों में मुंबई–पुणे, दिल्ली–वाराणसी और हैदराबाद–बेंगलुरु शामिल हैं, जो कुल मिलाकर लगभग 4,000 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेंगे। इस दिशा में मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पहला प्रमुख प्रोजेक्ट है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में तेजी से काम चल रहा है।
Image Source : NHSRCLमुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में तेजी से काम चल रहा है।

यह 508 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर है, जिसे 320 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। इन सभी पहलों के साथ भारत में हाई-स्पीड रेल युग की मजबूत शुरुआत हो रही है, जो भविष्य में तेज, सुरक्षित और अधिक कुशल अंतर-शहर यात्रा की नींव तैयार करेगी।

वर्ष 2025-26 के दौरान डिजिटल तकनीक और इन्फ्रास्ट्रक्चर 

निफाइड टेलीकॉम बैकबोन इंफ्रास्ट्रक्चर
रेलवे ने अपनी दूरसंचार प्रणाली को अपग्रेड करते हुए हाई-कैपेसिटी, मिशन-क्रिटिकल अनुप्रयोगों के लिए आईपी एमपीएलएस (इंटरनेट प्रोटोकॉल मल्टी-प्रोटोकॉल लेबल स्विचिंग) तकनीक को अपनाया है। यह सिस्टम केंद्रीकृत वीडियो निगरानी को सक्षम बनाता है और मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार (MTRC), यात्री आरक्षण प्रणाली (PRS), SCADA सहित कई प्रमुख परिचालन प्रणालियों को सपोर्ट करता है। अब तक यह नेटवर्क 1,396 रेलवे स्टेशनों पर सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है, जिससे डिजिटल रूप से एकीकृत रेलवे इकोसिस्टम की नींव और मजबूत हुई है।

कवच (KAVACH) सुरक्षा प्रणाली
भारतीय रेलवे ने स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ के विस्तार के साथ सुरक्षा ढांचे को और मजबूत किया है। इसे अब तक 3,100 रूट किलोमीटर से अधिक पर लागू किया जा चुका है, जबकि 24,400 किलोमीटर मार्ग पर इसका कार्यान्वयन जारी है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रेन टकराव को रोकना और परिचालन सुरक्षा को बढ़ाना है।

एआई-सक्षम वीडियो निगरानी
यात्रियों की सुरक्षा और निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए एआई आधारित एनालिटिक्स और फेस रिकग्निशन तकनीक से लैस वीडियो सर्विलांस सिस्टम (VSS) को 1,874 रेलवे स्टेशनों तक विस्तारित किया गया है।

एकीकृत यात्री सूचना प्रणाली
राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (NTES) से जुड़ी एकीकृत यात्री सूचना प्रणाली (IPIS) को 1,405 स्टेशनों पर लागू किया गया है। इससे यात्रियों को समय पर सूचना, बेहतर घोषणाएं और अधिक प्रभावी संचार सुविधा मिल रही है।

सुरंग संचार प्रणाली
सुरंग मार्गों में निर्बाध कनेक्टिविटी और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक (USBRL) सहित कई प्रमुख परियोजनाओं में आधुनिक संचार प्रणालियों को लागू किया गया है।

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