Thursday, January 08, 2026
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नोएडा में एक और एक्सप्रेसवे! यमुना पुश्ता रोड प्रोजेक्ट पर आया बड़ा अपडेट, जानें किसे मिलेगा फायदा

प्रोजेक्ट जब भी पूरा होगा, यह दिल्ली, नोएडा एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला एक वैकल्पिक हाई-कैपेसिटी मार्ग उपलब्ध कराएगा। इससे नोएडा एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Jan 07, 2026 01:18 pm IST, Updated : Jan 07, 2026 01:21 pm IST
पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई करीब 30 किलोमीटर होगी।- India TV Paisa
Photo:ऑफिशियल वेबसाइट पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई करीब 30 किलोमीटर होगी।

नोएडा एक्सप्रेसवे के विकल्प के तौर पर प्रस्तावित यमुना पुश्ता रोड प्रोजेक्ट को लेकर अपडेट है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हाई लेवल मीटिंग कर इस प्रोजेक्ट से जुड़े तमाम पहलुओं पर विचार-विमर्श किया है। सिंचाई विभाग की आपत्तियों के चलते अटके इस प्रोजेक्ट को जल्दी आगे कैसे बढ़ाया जाए, इसके लिए कवायद की जा रही है। बता दें, बीते महीने इस प्रोजेक्ट को बड़ा झटका तब लगा, जब सिंचाई विभाग ने यमुना के तटबंध (एम्बैंकमेंट) के पास निर्माण के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) देने से इनकार कर दिया।

30 किलोमीटर लंबा है प्रोजेक्ट

मीटिंग में प्रोजेक्ट की विस्तृत प्रस्तुति दी गई जिसमें प्रोजेक्ट का भौगोलिक एलाइनमेंट, फंडिंग पैटर्न, कंस्ट्रक्शन मॉडल और डिजाइन विकल्प शामिल थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि प्रोजेक्ट को कौन एजेंसी लागू करेगी, फंडिंग कैसे होगी और यमुना तटबंध की सीमाओं को देखते हुए कौन-सा तकनीकी डिजाइन अपनाया जा सकता है। 30 किलोमीटर लंबे दूसरे एक्सप्रेसवे से दिल्ली-एनसीआर के लोगों को काफी सुविधा होगी। 

कहां से कहां तक गुजरेगा एक्सप्रेसवे

यमुना पुश्ता रोड प्रोजेक्ट के तहत यह एलिवेटेड कॉरिडोर यमुना के तटबंध के साथ कालिंदी कुंज के पास से सेक्टर-150 नोएडा तक करीब 23 किलोमीटर लंबा होगा, जिसे आगे यमुना एक्सप्रेसवे तक बढ़ाया जाएगा। इस तरह पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई करीब 30 किलोमीटर होगी। नोएडा अथॉरिटी का कहना है कि अगर जरूरी मंजूरियां मिल जाती हैं और सड़क के वर्गीकरण से जुड़ा मुद्दा सुलझ जाता है, तो प्रोजेक्ट को एक्जीक्यूशन स्टेज में ले जाया जा सकता है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यह दिल्ली, नोएडा एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला एक वैकल्पिक हाई-कैपेसिटी मार्ग उपलब्ध कराएगा, जिससे नोएडा एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

हजारों करोड़ का निवेश, PPP मॉडल पर चर्चा

यमुना पुश्ता रोड प्रोजेक्ट में हजारों करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। चूकि अकेले नोएडा प्राधिकरण यह निवेश वहन करने की स्थिति में नहीं है। इसी वजह से बैठक में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के साथ-साथ किसी केंद्रीय या राज्य स्तरीय हाईवे एजेंसी से प्रोजेक्ट को करवाने के विकल्पों पर चर्चा की गई। यह भी विचार किया जा रहा है कि क्या इस प्रोजेक्ट को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) या उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के जरिए लागू किया जा सकता है। लेकिन यहां एक बात यह भी है कि अगर एनएचएआई को यह जिम्मेदारी दी जाती है, तो पहले यमुना पुश्ता रोड को नेशनल हाईवे घोषित करना जरूरी होगा। 

सिंचाई विभाग की आपत्तियां

प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी बाधा अब भी सिंचाई विभाग से एनओसी का न मिलना है। आपत्तियों में कहा गया है कि यमुना तटबंध के बेहद करीब निर्माण करने से तटबंध की संरचना कमजोर हो सकती है और ड्रेनेज चैनलों पर असर पड़ सकता है। इसके चलते ही सिंचाई विभाग ने एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के लिए NOC जारी करने से इनकार किया है। फिलहाल प्रोजेक्ट को एलिवेटेड स्ट्रक्चर के रूप में ही प्रस्तावित किया गया है। 

पहले भी मिल चुकी है बोर्ड की मंजूरी

आपको बता दें, यमुना पुश्ता रोड प्रोजेक्ट को मार्च 2025 में नोएडा प्राधिकरण बोर्ड के सामने रखा गया था, जहां इसे उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी को एक्जीक्यूटिंग एजेंसी बनाने की मंजूरी दी गई थी। साथ ही, प्रोजेक्ट की लागत को तीन विकास प्राधिकरणों के बीच साझा करने का फैसला हुआ था। 

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