1. Hindi News
  2. पैसा
  3. मेरा पैसा
  4. क्या चेक बाउंस होने पर भी घट जाता है आपका सिबिल स्कोर? कन्फ्यूजन है तो यहां करें दूर

क्या चेक बाउंस होने पर भी घट जाता है आपका सिबिल स्कोर? कन्फ्यूजन है तो यहां करें दूर

 Published : Jul 01, 2025 05:03 pm IST,  Updated : Jul 01, 2025 05:03 pm IST

बैंक लगातार चेक बाउंस मामलों को लेकर सावधान रहते हैं। सिबिल स्कोर के कमजोर होने से बैंक यह मान लेता है कि आप समय पर EMI चुकाने में असमर्थ हो सकते हैं।

एक बाउंस चेक बैंकों के मन में निगेटिव असर छोड़ता है। - India TV Hindi
एक बाउंस चेक बैंकों के मन में निगेटिव असर छोड़ता है। Image Source : INDIA TV

चेक बाउंस होने की बात आपने भी कई बार सुनी होगी। आपको भी लगता होगा कि चेक बाउंस होना कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन ऐसा नहीं है। बार-बार चेक अगर आप बाउंस होगा तो आपको इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। टाटा कैपिटल के मुताबिक, चेक बाउंस का लगातार पैटर्न अप्रत्यक्ष रूप से आपकी CIBIL रिपोर्ट को प्रभावित कर सकता है। सिबिल स्कोर आपकी लोन पाने की पात्रता को तय करने में अपनी भूमिका निभाता है। सिबिल स्कोर के कमजोर होने से बैंक यह मान लेता है कि आप समय पर EMI चुकाने में असमर्थ हो सकते हैं। ऐसे में चेक बाउंस न हो, इस पर गौर करना जरूरी है। 

चेक बाउंस से कैसे CIBIL स्कोर होता है प्रभावित

बैंक के साथ संबंध खराब करना

बैंक लगातार चेक बाउंस मामलों को लेकर सावधान रहते हैं। अगर आपका चेक तकनीकी समस्याओं के चलते एक बार अस्वीकृत हो जाता है, तो अधिकारी इसे एक अलग मामले के रूप में पास कर देते हैं। हालांकि, अगर यह एक नियमित समस्या बन जाती है, तो बैंक इसे वित्तीय गैर-जिम्मेदारी के रूप में देखता है। ऐसे में बैंक के साथ आपका रिलेशन खराब होता है।

क्रेडिट सुविधा पर लग सकता है बैन

रेगुलर चेक बाउंस के साथ, बैंक अधिकारी ओवरड्राफ्ट सुविधाओं को ब्लॉक कर सकते हैं, क्रेडिट लिमिट कम कर सकते हैं, या खाते को फ्रीज कर सकते हैं। ऐसे प्रतिबंध आपके वित्तीय लेनदेन और प्रबंधन को प्रभावित कर सकते हैं। व्यवसाय मालिकों के लिए, क्रेडिट सुविधाओं पर प्रतिबंध कैश फ्लो और विक्रेता भुगतान को प्रभावित करते हैं।

मुकदमेबाजी का करना पड़ सकता है सामना

अगर चेक बाउंस का मामला कोर्ट पहुंच जाता है तो अदालत आपके पक्ष में नहीं होगी। आपको एक रिकवरी ऑर्डर हासिल होगा, जिसके विफल होने से आपकी वित्तीय विश्वसनीयता को नुकसान हो सकता है। हालांकि कोर्ट का फैसला सीधे आपके CIBIL स्कोर को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन भविष्य में आपके एप्लीकेशन अस्वीकार किए जा सकते हैं।

जोखिम बढ़ाता है

एक बाउंस चेक बैंकों के मन में निगेटिव असर छोड़ता है। उन्हें लगता है कि आप एक हाई  रिस्क वाले ग्राहक हैं और हो सकता है कि वे आपके लोन एप्लीकेशन को अप्रूव न करें। हालांकि, यह सीधे आपकी क्रेडिट रिपोर्ट या सिबिल रिपोर्ट को प्रभावित नहीं कर सकता है, लेकिन यह लोन स्वीकृति हासिल करने की आपकी संभावनाओं को कम कर सकता है।

CIBIL स्कोर क्या है? 

CIBIL यानी क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड 3 अंकों की एक संख्या जारी करता है जिसे सिबिल स्कोर कहा जाता है। यह 300 से 900 के बीच होता है और खाताधारक की क्रेडिट और रीपेमेंट क्षमता को दर्शाता है। क्रेडिट स्कोर आपके वित्तीय इतिहास, EMI रीपेमेंट और क्रेडिट कार्ड बिल क्लीयरेंस द्वारा तय किया जाता है। 750 से ऊपर का स्कोर कम जोखिम को दर्शाता है 750 से नीचे का स्कोर हाई रिस्क को दर्शाता है।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Personal Finance से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा