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पंजाब में मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे प्राइवेट स्कूल, भगवंत मान सरकार ने लगाई रोक

 Published : Jul 13, 2026 09:54 pm IST,  Updated : Jul 13, 2026 09:54 pm IST

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यदि किसी निजी स्कूल ने पिछले 3 वर्षों में फीस में 15 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी की है, तो स्कूल को अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी।

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पंजाब सीएम भगवंत मान Image Source : REPORTER INPUT

पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुआई वाली सरकार ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) ऑर्डिनेंस, 2026' लागू कर दिया है। इससे राज्य के 32 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है। अब निजी स्कूलों की फीस सख्त रेगुलेटरी ढांचे के अधीन आ चुकी है। पंजाब सरकार का नया ऑर्डिनेंस वार्षिक फीस वृद्धि को 5 प्रतिशत पर सीमित करता है। इसके साथ ही उन मामलों में फीस रिफंड अनिवार्य करता है, जहां पिछले तीन वर्षों में फीस की बढ़ोतरी 15 प्रतिशत से ज्यादा हुई है। नए कानून के तहत ट्रांसपोर्ट और बिल्डिंग फीस सहित सभी शुल्को ट्यूशन फीस का हिस्सा माने जाएंगे। नियमों के उल्लंघन पर स्कूलों की मान्यता रद्द करने सहित कड़ी सजाओं का प्रावधान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दोहराते हुए कि शिक्षा को व्यापार बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उपायुक्तों की अध्यक्षता वाली रेगुलेटरी कमेटियां फीस वृद्धि की बारीकी से जांच करेंगी, जबकि सभी निजी स्कूलों को अगले 10 दिनों के भीतर निर्धारित पोर्टल पर पिछले चार वर्षों में फीस में की गई बढ़ोतरी का रिकॉर्ड अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।

पंजाब में लागू हुआ नया ऑर्डिनेंस

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य सरकार द्वारा लाए गए इस ऑर्डिनेंस को अपनी स्वीकृति देने के लिए राज्यपाल का तहे दिल से धन्यवाद किया और कहा कि यह आज से ही लागू हो गया है। "आज से हर निजी शैक्षणिक संस्थान को पिछले चार वर्षों के दौरान एकत्रित की गई फीस का पूरा विवरण 10 दिनों के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना होगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही यह अवधि समाप्त होगी, यदि कोई संस्थान विद्यार्थियों से अतिरिक्त फीस वसूलने में शामिल पाया गया तो उसे वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने निजी शैक्षणिक संस्थानों को विद्यार्थियों और अभिभावकों पर अनावश्यक फीस थोपने की छूट दी हुई थी, जिससे शिक्षा प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थान विभिन्न खातों के माध्यम से फीस एकत्र करके शिक्षा के नाम पर मुनाफा नहीं कमा सकते।

फोरेंसिक ऑडिट कराएगी सरकार

सीएम ने कहा, "इन संस्थानों द्वारा किसी भी माध्यम से एकत्रित की गई वास्तविक फीस का पता लगाने के लिए एक फोरेंसिक ऑडिट करवाया जाएगा। निजी अन-एडेड स्कूलों द्वारा फीस में मनमाने ढंग से की जाने वाली बढ़ोतरी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए पंजाब सरकार ने 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) ऑर्डिनेंस, 2026' अधिसूचित किया है।"

5 फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ेगी फीस

ऑर्डिनेंस के मुख्य प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अब वार्षिक फीस वृद्धि की सीमा 5 प्रतिशत निर्धारित की गई है और इस सीमा से अधिक वृद्धि करने के लिए रेगुलेटरी प्राधिकरण से पहले अनुमति लेनी होगी। उन्होंने कहा कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले 3 वर्षों के दौरान कुल मिलाकर अपनी फीस में 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की है, उन्हें अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी। यह फैसला जहां निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करेगा वहीं पारदर्शिता और जवाबदेही को लागू करके 32 लाख से अधिक विद्यार्थियों और उनके परिवारों को अनुचित वित्तीय बोझ से बचाएगा।

शिक्षा नेक और पवित्र कार्य

मुख्यमंत्री ने कहा, ''शिक्षा एक नेक और पवित्र कार्य है। यह एक जनकल्याण का साधन है, न कि मुनाफे के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कोई व्यावसायिक उद्यम। पंजाब के हर विद्यार्थी के लिए मानक शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करना हमारी सरकार की सबसे प्रमुख प्राथमिकता है।" मुख्यमंत्री ने बताया कि इस समय पंजाब भर के लगभग 7,800 निजी स्कूलों में 32 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं और यह ऑर्डिनेंस खासकर उन विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा "यह ऑर्डिनेंस निजी शैक्षणिक संस्थानों के कामकाज में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों और उनके परिवारों को फीस में मनमानी बढ़ोतरी के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है। हमारी सरकार के सुहृद प्रयासों के कारण पंजाब शिक्षा क्षेत्र में केरल से भी आगे निकल गया है।"

नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑर्डिनेंस की पूरी पालना सुनिश्चित करने के लिए कड़े दंड शामिल किए गए हैं। "ऑर्डिनेंस के नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी निजी स्कूल को पहली उल्लंघन के लिए 50,000 रुपये और दूसरी उल्लंघन के लिए 1 लाख रुपये जुर्माना देना होगा। तीसरी बार उल्लंघन करने पर विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए और कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।" उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि अभिभावकों से वसूली जाने वाली हर राशि को रेगुलेशन के उद्देश्य के लिए फीस का हिस्सा ही माना जाएगा। उन्होंने आगे कहा "अभिभावकों से लिया गया कोई भी पैसा, चाहे उसका विवरण कुछ भी हो, उसे फीस ही माना जाएगा और निजी स्कूलों द्वारा पिछले तीन वर्षों के दौरान वसूली गई कोई भी अतिरिक्त फीस अभिभावकों को वापस करनी होगी।"

किसी कीमत पर नहीं पनपेंगे शिक्षा माफिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने प्रदेश में चल रहे हर अपवित्र गठजोड़ को पहले ही समाप्त कर दिया है और शिक्षा माफिया को भी किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से वसूले जाने वाले सभी शुल्क, जिसमें ट्रांसपोर्टेशन शुल्क, बिल्डिंग फंड और अन्य फुटकर फीस शामिल हैं, को रेगुलेटरी उद्देश्यों के लिए ट्यूशन फीस का हिस्सा माना जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा को कभी भी व्यावसायिक उद्यम नहीं बनने देगी। उन्होंने आगे कहा कि उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला रेगुलेटरी कमेटी फीस वृद्धि के सभी प्रस्तावों की जांच और नियंत्रण करेगी।

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