पर्ल यानी मोती चंद्रमा का रत्न माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो चंद्रमा मंन के कारक हैं। ऐसे में मान्यता है कि मोती पहनने वाले व्यक्ति के मन से सभी नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मन शांत रहता है। मोती धारण करने वाले शादीशुदा जातक के जीवन में साथी से जुड़े सभी मनमुटाव दूर होते हैं। साथ ही प्रेम संबंध भी मधुर होता है। वहीं, जिन छात्रों का पढ़ाई में मन नहीं लगता उन्हें भी मोती धराण करने पर फायदा होता है, ऐसे में बस मोती धारण करने से पहले जातकों को कुछ विशेष बातों को ध्यान रखना अति आवश्यक है तो आइए जानते हैं...
ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि मनुष्य जिस हाथ का उपयोग सबसे ज्यादा करता है, उसे उसी हाथ में मोती की अंगूठी पहननी चाहिए, जैसे कोई दायां हाथ इस्तेमाल करता है तो उसे मोती की रिंग दाएं हाथ में धारण करनी चाहिए इससे शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
आगे कहा गया कि दाएं हाथ का इस्तेमाल अधिक करने वाले जातक उसी हाथ के कनिष्ठिका यानी छोटी उंगली में मोती की अंगूठी पहनें, इससे चंद्रमा अधिक प्रभावी होंगे। वहीं, रत्न के लिए बता दें कि चांदी में मोती को पहनना शुभ होता है।
याद रखें कि हिंदू धर्म में कोई भी काम शुभ मुहूर्त में करना फलदायी होता है। ऐसे में मोती की रिंग को शुक्ल पक्ष के किसी भी सोमवार को धारण करना शुभ है। इसके अलावा, इसे पूर्णिमा के दिन भी धारण करना फलदायी साबित होगा। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया कि मोती की रिगं कम से कम 7-8 रत्ती होनी चाहिए तो ही शुभ फलदायी होगी।
वहीं, इससे पहने से पहले गंगाजल या गाय के कच्चे दूध में 10 मिनट तक भिगोना चाहिए और रिंग धारण करने से पहले 108 बार ऊं चंद्राय नम: मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
ये भी पढ़ें:
Yogini Ekadashi 2025: योगिनी एकादशी पर जरूर करें इन 5 वस्तुओं का दान, घर दौड़ी चली आएगी धन-संपदा
संपादक की पसंद