Maha Shivratri 2026 Puja Vidhi (महाशिवरात्रि पूजा विधि), Mahashivratri Aarti, Bhajan, Mantra, Chalisa Live Update: महाशिवरात्रि यानी फाल्गुन मास की मासिक शिवरात्रि शिव भक्तों के लिए बेहद खास होती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं। इस बार कि महाशिवरात्रि ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन पूरे 300 साल बाद बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है।दरअसल इस शिवरात्रि 12 शुभ योग और 4 राजयोग एक साथ रहेंगे। ऐसे में इस दिन शिव की पूजा से विशेष शुभ फलों की प्राप्ति होगी। इस दिन पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त रात 12:09 से देर रात 01:01 बजे तक रहेगा। यहां आप जानेंगे महाशिवरात्रि 2026 से जुड़ी हर एक जानकारी- जैसे पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती, चालीसा, भजन इत्यादि।
महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद बना ये दुर्लभ संयोग (Maha Shivratri Shubh Sayong)
महाशिवरात्रि पर बुधादित्य राजयोग, लक्ष्मी नारायण राजयोग, शुक्रादित्य राजयोग और चतुर्ग्रही राजयोग का शुभ संयोग रहेगा। इसके अलावा इस दिन प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, साध्य, शिव, शुक्ल, शोभन, सर्वार्थसिद्ध, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव योग का भी निर्माण हो रहा है।
महाशिवरात्रि पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त 2026 (Maha Shivratri Puja Ka Sabse Shubh Muhurat 2026)
महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त 15 फरवरी 2026 की शाम 06:11 से शुरू होकर देर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा।
महाशिवरात्रि पूजा विधि (Maha Shivratri Puja Vidhi)
- महाशिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। काले रंग के कपड़े न पहनें।
- इसके बाद पूजाघर में दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, फूल, चंदन, रोली, अबीर इत्यादि से शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करें।
- इसके बाद मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, चंदन, रोली, अक्षत इत्यादि चीजें चढ़ाएं।
- दिन भर व्रत रहें और जब समय मिले भगवान का ध्यान भी करते रहें।
- दिन में किसी भी समय रुद्राभिषेक भी जरूर कराएं। अगर ये संभव न हो तो शाम में शिवलिंग का खुद ही अभिषेक करें।
- शाम में फिर से भगवान शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करें और उन्हें धतूरा, भांग, बेलपत्र इत्यादि चीजें चढ़ाएं।
- साथ ही महाशिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनें और इसके बाद भगवान शिव की कपूर से आरती करें।
- आरती के बाद भोग लगाकर पूजा संपन्न करें।
- संभव हो तो इस दिन रात्रि भर जागरण करें।
- इस दिन रात्रि के चारों प्रहर की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। (यहां जानिए रात्रि के चारों प्रहर की पूजा विधि)
महाशिवरात्रि पूजा के शुभ मुहूर्त 2026 (Maha Shivratri 2026 Puja Muhurat)
| निशिता काल पूजा समय | 12:09 AM से 01:01 AM, फरवरी 16 |
| रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय | 06:11 PM से 09:23 PM |
| रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय | 09:23 PM से 12:35 AM, फरवरी 16 |
| रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय | 12:35 AM से 03:47 AM, फरवरी 16 |
| रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय | 03:47 AM से 06:59 AM, फरवरी 16 |
शिव जी की आरती (Maha Shivratri 2026 Shiv Ji Ki Aarti)
- जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा।
- ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव॥
- एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
- हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव॥
- दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
- त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव॥
- अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
- चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव॥
- श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
- सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव॥
- कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
- जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव॥
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
- प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव॥
- काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
- नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव॥
- त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
- कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव॥
(महाशिवरात्रि पर्व से जुड़ी हर जानकारी के लिए बने रहिए हमारे इस लाइव ब्लॉग पर)