Wednesday, January 21, 2026
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आरती की दिशा बदल सकती है आपकी ऊर्जा, क्यों दक्षिणावर्त घुमाई जाती है आरती की थाली? जानें धार्मिक रहस्य और सही तरीका

Why Aarti Performed Clockwise: हिंदू धर्म में ईश्वर की विधि-विधान से पूजा के बाद आरती करने का विधान है। आरती को हमेशा दक्षिणावर्त दिशा में घुमाई जाती है। इसके पीछे प्रकृति का सिद्धांत, ऊर्जा का प्रवाह और धार्मिक महत्व जुड़ा है। जानें भगवान की आरती करते समय थाली कितनी बार और किस दिशा में घुमाना चाहिए।

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
Published : Dec 04, 2025 07:05 pm IST, Updated : Dec 04, 2025 07:05 pm IST
Aarti Clockwise direction- India TV Hindi
Image Source : PEXELS क्यों दक्षिणावर्त घुमाई जाती है आरती की थाली?

Why Aarti Performed Clockwise: मंदिरों में पूजा करते समय अक्सर हम देखते हैं कि पुजारी आरती की थाली को हमेशा दक्षिणावर्त यानी घड़ी की दिशा में घुमाते हैं। यह सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। माना जाता है कि आरती की दिशा और गति, दोनों मिलकर सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय करती हैं।

प्रकृति के प्राकृतिक क्रम का पालन

हिंदू धर्म में आरती को दक्षिणावर्त घुमाना प्रकृति के गति क्रम का प्रतीक माना गया है। पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, सूर्य उदय होता है और अस्त होता है, घड़ी की सुइयाँ भी उसी दिशा में बढ़ती हैं। इसलिए आरती को इसी प्राकृतिक लय के साथ घुमाना ब्रह्मांड की गति से अपने मन, ऊर्जा और पूजा को जोड़ने का तरीका माना जाता है। कहा गया है कि विपरीत दिशा में आरती करना ऊर्जा के प्रवाह के विरुद्ध माना जाता है।

दाहिनी दिशा की पवित्रता

हिंदू संस्कृति में दाहिना भाग शुभ और पवित्र माना जाता है। मंदिर में परिक्रमा दाहिनी ओर रखते हुए की जाती है। पूजा में प्रसाद, जल, फूल और आशीर्वाद देना भी दाहिने हाथ से ही होता है। जब आरती दक्षिणावर्त की जाती है, तो भगवान भक्त के दाहिनी ओर स्थिर रहते हैं, जो सम्मान और भक्ति का प्रतीक है।

सकारात्मक ऊर्जा का चक्र

आरती केवल दीपक घुमाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि मंदिर में दिव्य ऊर्जा सक्रिय करने का एक माध्यम है। दक्षिणावर्त चक्र में घूमने से सकारात्मक ऊर्जा पूरे परिसर में समान रूप से फैलती है। भक्त जब दीपक की ज्योति को अपने हाथों से आंखों तक लगाते हैं, तो माना जाता है कि वे उस दिव्य ऊर्जा और आशीर्वाद को स्वयं में ग्रहण करते हैं।

आरती की थाली कितनी बार घुमानी चाहिए?

शास्त्रों के अनुसार थाली को घड़ी की दिशा में कुल 14 बार घुमाना चाहिए। पहले चरणों में 4 बार, नाभि पर 2 बार और मुख पर 1 बार। यह क्रम 14 लोकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना गया है।

प्रकाश का आध्यात्मिक महत्व

आरती की लौ ज्ञान, जागृति और सकारात्मकता का प्रतीक है। जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ती हैं, वैसे ही दक्षिणावर्त घूमने वाली आरती आध्यात्मिक उन्नति का संकेत देती है और जीवन से अंधकार को दूर करने का संदेश देती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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