चयन समिति के पूर्व अध्यक्ष संदीप पाटिल ने कहा है कि "दिसंबर 2014 में धोनी के टेस्ट से अचानक रिटायर होने के बाद उनकी वनडे कप्तानी को लेकर काफी विचार विमर्श हुआ था। ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट लिरीज़ के बीच में धोनी का अचानक टेस्ट से सन्यास लेना का फ़ैसला चौंकानेवाला था।"
क्रिकइंफो के अनुसार पाटिल ने कहा कि चयन समिति ने पहले वनडे का कप्तान बदलने के बारे में सोचा लेकिन 2015 विश्व कप को देखते हुए कप्तानी नहीं बदली क्योंकि विश्व कप कुछ महीने ही दूर था। "बिल्कुल (धोनी की कप्तानी ख़तरे में थी)। इस बारे में काफी विचार विमर्श हुआ और एक बार नहीं कई बार हुआ। "लेकिन हमने उन्हें ही चुना क्योंकि विश्व कप सामने था और अगर आप विश्व कप के पहले किसी नये खिलाड़ी को कप्तानी देते हैं तो उसे समय भी देना चाहिये लेकिन ये मौक़ा चयन समिति को नहीं मिला। हमारे पास प्रयोग करने का वक़्त नही था।"
धोनी का फ़ैसला चौंकाने वाला था
वनडे कप्तान धोनी ने मलबर्न में बॉक्सिंग डे टेस्ट के बाद सन्यास की घोषणा कर दी थी और तब भारत तीन टेस्ट की सिरीज़ में 2-0 से पिछड़ा हुआ था। पाटिल ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया का दौरा कठिन था और धोनी ने अचानक सन्यास लेने का फ़ैसला कर लिया लेकिन अपने भविष्य के बारे में फ़ैसला वही कर सकते थे। "मैं ये तो नही कहूंगा कि जहाज़ डूब रहा था लेकिन हां दौरा कठिन था। हमारे खिलाड़ियों के वहां काफी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ा, विराट कोहली को छोड़कर बाकी का प्रदर्शन अच्छा नही था।
"ऐसे हालात में एक वरिष्ठ खिलाड़ी का ऐसा फ़ैसला करना वो भी अचानक, चौंकानेवाला था। हमने (चयनकर्ता) इस पर काफी सोच विचार किया, ये कैसे हुआ? लेकिन ये उसका फ़ैसला था। एक खिलाड़ी ही अपने शरीर, अपनी सोच और अपनी फिटनेस के बारे में बेहतर जानता है और इस बारे में वो ही फ़ैसला कर सकता है। मुझे लगता है कि धोनी ने सही वक़्त पर सही फ़ैसला किया।"
धोनी ने कहा परफ़ार्म नही कर पा रहा था
पाटिल ने कहा कि चयनकर्ताओं ने धोनी से रिटायरमेंट के समय के बारे में पूछा था। उन्होंने कहा कि चूंकि सन्यास का फ़ैसला सिरीज़ के बीच में किया गया था इसलिए हमने उनसे इस बारे में पूछा और धोनी का कहना था कि 'एक स्तर पर टीम में मेरा योगदान होना चाहिये जो हो नही रहा था और जब मैं योगदान नहीं कर पा रहा था तो मुझे लगा कि मुझे बाहर हो जाना चाहिये।' बहुत कम खिलाड़ी ऐसा फ़ैसला कर पाते हैं, बहुत कम खिलाड़ी इस तरह से सोच सकते हैं। आमतौर पर हर खिलाड़ी ज्यादा से ज़्यादा खेलना चाहता है। वो सोचते हैं एक सिरीज़ और खेल लूं, एक साल और खेल लूं…।"
सचिन ने कैसे लिया वनडे से सन्यास?
वनडे से सिचन तेंदुलकर के सन्यास के बारे में पाटिल ने कहा कि दिसंबर 2012 में हमने सचिन से इस बारे में बात की थी। इंग्लैंड के ख़िलाफ़ नागपुर टेस्ट के दौरान चयनकर्का राजेंदर हंस और मैंने सचिन से बात की थी। "मुझे याद है वो नागपुर टेस्ट था। सचिन जब आउट होकर आए तो हम चयनकर्ताओं ने सचिन से उनके िरादे के बारे में बात करने का फ़ैसला किया। सचिन टेस्ट पर ध्यान देना चाहते थे तो हमने जब उनसे बात की तो उन्होंने कहा कि वह वनडे से सन्यास लेना चाहते हैं और उन्होंने मेरे सामने BCCI के सचिव संजय जगदाले को फ़ोनकर कहा कि मैं वनडे नहीं खेलना चाहता"
सचिन ने एक साल बाद 2013 में टेस्ट से भी सन्यास ले लिया था।
पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने कहा था कि जिस तरह से चयनकर्ताओं ने उन्हें निकाल उससे उन्हें दुख हुआ था। फिर हाल ही में उन्होंने कहा कि बेहतर होता कि उन्हें एक विदाई टेस्ट खेलने दिया होता। पाटिल ने कहा कि उन्हें खिलाड़ियों से हमदर्दी रहती है लेकिन विदाई टेस्ट की मांग करना उनका अधिकार नही है। "अगर आप तय करते हैं कि सभी को विदाई टेस्ट मिलना चाहिये तो ये ग़लत है। सचिन का मामला अलग था।