
अब अगर बात करें वेस्ट इंडीज़ की तो वो गेल की तूफ़ानी लहरों पर सवार है। गेल ने तीन पारियों में 208 के स्ट्राइक रेट से 104 रन बनाए हैं। पॉवर प्ले में (पहले 6 ओवर) में अगर वो रंग में आ गए तो बॉल ज़मीन पर कम आसमान में ज़्यादा नज़र आती है। हालंकि वेस्ट इंडीज़ के पास कप्तान डैरन सैमी, लेंडल सिमंस, डैरन ब्रावो और जॉन्सन चार्ल्स जैसे ख़तरनाक बल्लेबाज़ हैं लेकिन फिर भी टीम पूरी तरह गेल पर ही निर्भर करती है। अगर वेस्ट इंडीज़ को टीम इंडिया से पार पाना है तो बाक़ी बल्लेबाज़ों को भी दम दिखाना होगा।
बॉलिग के लिहाज़ से वेस्ट इंडीज़ टीम इंडिया पर भारी पड़ती दिखती है। सैमुएल बद्री टी20 के नंबर एक गेंदबाज़ हैं और अब तक 4 मैचों में 6 विकेट ले चुके हैं। वहीं आंद्रे रसल भी 7 विकेट ले चुके हैं। वो तबड़तौड़ बल्लेबाज़ी भी कर लेते हैं। अगर रोहित और धवन पहले रसल को और बाद में विराट ने स्पिनर सुलेमान बेन और बद्री को साध लिया तो वेस्ट इंडीज़ का सफ़र मुंबई में ख़त्म हो सकता है।
क्या हो रणनीति....?
वानखेड़े की पिच पर पिछले चार मैचों का औसत 199 है। मतलब साफ है जो टीम पहले बैटिंग करती है तो बनाए 200+ और फील्डिंग करती है तो रोके विरोधी को 160-70 के आसपास।
गेल की कमज़ोरी ऑफ स्पिन है. अश्विन उन्हें चार बार आउट कर चुके हैं। कहा ये भी जाता है कि लंबाई की वजह से गेल को यॉर्कर खेलने में परेशानी होती है और बूमरा को इस गेंद का इस्तेमाल करना चाहिये। लेकिन ये भी नहीं भूलना चाहिये कि यही लंबाई गेल की ताक़त भी है। वो यॉर्कर को बहुत आसानी से फुलटॉस भी बना लेते हैं।
बहरहाल देखना ये है कि वानकेड़े की पिच स्पिनर्स का साथ देती है या बल्लेबाज़ों का लेकिन दोनों ही सूरतों में मुक़ाबला तो बल्लेबाज़ बनाम बलेबाज़ ही होगा।