नई दिल्ली: रियो ओलंपिक शुरु हो चुका हैं। जिसमें बारत सहित विभिन्न देशों के खिलाड़ी पदक जीतने के लिए अपनी पूरी क्षमता लगा रहे हैं। लेकिन इसके साथ एक चीज कुछ ज्यादा ही सबसे सामने आ रही हैं। वो हैं कुछ खिलाड़ियों के शरीर में पड़े लाल चकत्ते यानी दाग।
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इस बात की अटकले लगाई जा रही हैं कि खिलाडी जितने के लिए किसी चीज से शरीर को दाग रहे हैं। अभी हाल में ही रियो ओलंपिक में अब तक कुल 19 स्वर्ण पदक जीतने वाले तैराक माइकल फलेप्स के शरीर पर भी ये ही निशान नजर आए। जिसके कारण वह लोगों के नजर में आई। हम आपको बताते है कि आखिर ये निशान कैसे हैं।
ये निशान चीन की पुरानी चिकित्सा पद्धति एक्यूपंचर के ही एक प्रकार 'कपिंग' के हैं। इसमें गर्म कप को त्वचा पर रखकर दर्द का इलाज किया जाता है।
ऐसे होता हैं इस पद्धति में
चीन में ये पद्धति का काफी फेमस भी हैं। इस कपिंग चिकित्सा पद्धति में ज्वलनशील पदार्थ को शीशे के एक कप में जलाया जाता है। लौ के बुझने के बाद तापमान कम होने से पैदा हुए खिंचाव से त्वचा खींच कर शीशे के कप से चिपक जाती है।
ऐसे हुई इसकी शुरुआत
कपिंग की शुरुआत करीब 3 हजार साल पहले चीन में हुई थी। यह मिस्र, मध्य-पूर्व और दुनिया के अन्य हिस्सों में मशहूर है।
बेमिसाल फायदे
खिलाड़ियों के अनुसार इसे कराने से लगातार खलने से हो रहे तनाव से निजात मिलता हैं। इसके साथ ही यह दर्द मिटाने में इसका इस्तेमाल किया जाता हैं। साल 2004 में ग्येनेथ पाल्ट्रो एक फ़िल्म के प्रीमियर में अपनी पीठ पर कपिंग के निशान के साथ पहुची थीं। जस्टिन बीबर, विक्टोरिया बैखहम, जेनिफ़र एनिस्टान की कपिंग के निशान की तस्वीरें सामने आईं हैं।
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