Kavach System kya hai: ओडिशा के बालासोर (Balasore train accident) में शुक्रवार को भयानक ट्रेन हादसा हुआ जिसमें तीन ट्रेने आपस में भिड़ गईं। इन तीन ट्रेनों (Odisha train accident) में एक माल गाड़ी थी जबकि दो पैसेंजर ट्रेन थीं। इस दर्दनाक हादसे में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है। हादसे के बाद सब यही जानने की कोशिस में लगे हैं कि आखिर इतना बड़ा ट्रेन हादसा कैसे हो गया। इस बीच भारतीय रेलवे (Indian Railways) के उस कवच सिस्टम (Kavach System) को लेकर भी बात हो रही है जिसका रेलवे की तरफ से कुछ समय डेमो दिखाया गया था। आइए आपको बताते हैं कि आखिर कवच सिस्टम क्या है और यह कैसे ट्रेन हादसे को रोकता है।
ओडिशा (Odisha train Accident) के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे (Balasore train accident reason) की जांच के लिए उच्च स्तरीय टीम का गठन हो चुका है। शुरुआती जांच में यह पाया गया है कि जिस रूट में यह ट्रेन हादसा हुआ उसमें रेलवे का कवच सिस्टम नहीं लगा था। अगर ट्रैक में कवच सिस्टम लगा होता तो शायद इतना बड़ा ट्रेन हादसा नहीं होता।
आपको बता दें कि कवच सिस्टम रेलवे का एक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। यह कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का सेट होता है। ट्रेन हादसे का शिकार न हों इसके लिए इसमें रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइसेस को ट्रेन, ट्रैक, रेलवे सिग्नल सिस्टम और हर स्टेशन पर एक किलोमीटर की दूरी पर इंस्टॉल किया जाता है। इस सिस्टम में दूसरे कंपोनेंट्स से अल्ट्रा हाई रेडियो फ्रिक्वेंसी के जरिए जुड़े रहते हैं।
अगर कोई लोको पायलट यानी ट्रेन का ड्राइवर किसी सिग्नल को जंप करता है तो कवच सिस्टम एक्टिव हो जाता है। कवच सिस्टम के एक्टिव होते ही ट्रेन के पायलट को अलर्ट पहुंचता है। इतना ही नहीं कवच सिस्टम ट्रेन के ब्रेक्स का कंट्रोल भी ले लेता है। अगर कवच सिस्टम को यह पता चले की ट्रैक पर दूसरी ट्रेन आ रही है तो वह पहली ट्रेन के मूवमेंट को भी रोक देता है।
भारतीय रेलवे का कवच सिस्टम जिस ट्रैक और रूट पर लगा होता है वह उस ट्रैक पर चलने वाली ट्रेन के मूवमेंट को भी मॉनिटर करता है। आपको आसान भाषा में बताते हैं कि यह सिस्टम तब एक्टिव होता है जब एक ट्रैक पर दो ट्रेन आ रही होती हैं। कवच सिस्टम दोनों ट्रेनों को एक निश्चित दूरी पर रोक देता है।
आपको बता दें कि इस कवच सिस्टम को भारतीय रेलवे ने रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन की मदद से तैयार किया है। रेलवे ने इस कवच सिस्टम पर 2012 में काम शुरू किया था। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट का नाम Train Collision Avoidance System था। रेलवे ने इस कवच सिस्टम को ट्रेन के जीरो एक्सीडेंट लक्ष्य को हासिल करने के लिए तैयार किया गया था।
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