क्रिसिल के अनुसार वास्तविक जीडीपी की ऊंची वृद्धि की मुख्य वजह निजी खपत रही। आपूर्ति पक्ष से देखें तो विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की वृद्धि में उल्लेखनीय तेजी आई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी उपलब्ध है, जिससे वित्तीय स्थिति को सहारा मिलेगा। अच्छा मॉनसून और रेपो रेट में कटौती घरेलू वृद्धि को सहारा देंगे।
कंपनी द्वारा दिया जाने वाला ये वित्त वर्ष 2024 25 का फाइनल डिविडेंड होगा। हालांकि, शेयरहोल्डरों को डिविडेंड का भुगतान करना है या नहीं, इसका फैसला 30 अप्रैल को होने वाली सालाना मीटिंग में शेयरहोल्डर खुद करेंगे।
सरकार पिछले कुछ सालों से अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा निवेश कर रही है और कॉरपोरेट पूंजीगत व्यय में भी सुधार की मांग उठ रही है। हालांकि, नई क्षमताएं बनाने के लिए निवेश करने के बजाय भारतीय उद्योग जगत ने कर्ज चुकाने और अन्य उपायों में खूब पैसा लगाया है, जबकि क्षमता उपयोग का स्तर ऊंचा है।
ऑस्ट्रेलिया मूल के प्रीमियम कम अस्थिरता वाले ग्रेड के लिए कोकिंग कोल की हाजिर कीमत 2024 में 12 प्रतिशत घटी, जबकि इस अवधि के दौरान लौह अयस्क की कीमतों में 9-10 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।
द वेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट में कहा गया है कि धनी अभिजात वर्ग में एंट्री करने वाली महिलाओं की संख्या में तेजी आ रही है। 40 प्रतिशत से ज्यादा धनी महिलाएं 51-60 साल की उम्र के बीच की हैं। जिनमें कई कम जोखिम वाले और स्थिर निवेश को अपनाती हैं।
क्रिसिल के मुताबिक, बांग्लादेश के साथ भारत का व्यापार अपेक्षाकृत कम है। यह पिछले वित्त वर्ष में इसके कुल निर्यात का 2.5 प्रतिशत और कुल आयात का 0.3 प्रतिशत था।
बैंक ऋण वृद्धि उपभोक्ताओं और व्यवसायों को जारी किए गए बकाया बैंक ऋणों के कुल मूल्य में बदलाव को मापती है। वित्त वर्ष 2024-25 में (सकल घरेलू उत्पाद) जीडीपी वृद्धि दर भी घटकर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
पिछले तीन-चार साल में गाड़ियों की लागत में बढ़ोतरी हुई है क्योंकि विनिर्माता प्रीमियम वाहनों की कीमतें बढ़ा रहे हैं और उन्हें सुरक्षा और उत्सर्जन पर ज्यादा कड़े नियमों का पालन करना पड़ रहा है।
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी के जोशी ने अपने वार्षिक वृद्धि अनुमान में कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, लगातार ऊंची मुद्रास्फीति और इसका मुकाबला करने के लिए ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी ने वैश्विक परिवेश को और अधिक निराशाजनक बना दिया है।
क्रिसिल की रिपोर्ट कहती है, ‘‘इन सबके बावजूद भारत के आर्थिक परिदृश्य से जुड़े जोखिम अब भी बरकरार हैं।
दूसरी ओर 20 प्रतिशत सबसे अमीर आबादी गैर-खाद्य वस्तुओं पर अधिक खर्च करती है, जो बीते महीने महंगी हुईं। गौरतलब है कि अक्टूबर 2021 में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई, जो इससे पिछले महीने 4.3 प्रतिशत थी।
मामलों के समाधान में लगने वाला औसत समय भी 419 दिन रहा है जबकि संहिता में इसके लिए अधिकतम 330 दिन की समयसीमा तय है।
नेशनल असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एनएआर) के चालू वित्त वर्ष के अंत तक परिचालन में आने और पहले चरण में 90,000 करोड़ रुपये के एनपीए की संभावित बिक्री से उक्त सकल एनपीए में कमी आ सकती है।
वहीं अनुमान है कि वित्त वर्ष 2021-2022 की पहली छमाही के लिए, कुल आय पिछले साल के मुकाबले 32 प्रतिशत की बढ़त के साथ 15.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
यह सर्वेक्षण दोपहिया वाहनों, यात्री और वाणिज्यिक वाहनों के 123 से अधिक डीलरों के बीच किया गया, जिसका मकसद डीलरों की भावनाओं और अपेक्षाओं का आकलन करना था।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक ईंधनों से हासिल होने वाले करों की प्राप्तयों में उछाल और केंद्रीय अनुदानों के बढ़ने से राजस्व बढ़ेगा
रिजर्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष के लिये आर्थिक वृद्धि के अनुमान को एक प्रतिशत अंक कम करके 9.5 प्रतिशत कर दिया है।
रिजर्व बैंक ने 2020-21 के लिये आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट के अनुमान को संशोधित कर 7.5 प्रतिशत कर दिया है जबकि पहले रिजर्व बैंक ने 9.5 प्रतिशत गिरावट की आशंका जतायी थी।
खरीफ सत्र 2020 में बुवाई का रकबा दो से तीन प्रतिशत बढ़कर 10.9 करोड़ हेक्टेयर होने से कृषि उत्पादन में 5-6 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त उत्पादकता भी दो से तीन प्रतिशत बढ़ने से, बम्पर खरीफ उत्पादन होने के आसार
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