भारत ने कॉप-30 के लिए ब्राजील का खुला समर्थन किया है। साथ ही ग्लोबल साउथ के समर्थन के लिए वैश्विक आह्वान किया है।
आइसलैंड में तेजी से पिघल रही बर्फ ने यूरोप के अस्तित्व का खतरा बढ़ा दिया है। आर्कटिक सागर में बर्फ के बड़े-बड़े पहाड़ ग्लोबल वार्मिंग के चलते ढह रहे हैं। यह हिमयुग के खतरे को बढ़ा रहा है। इससे दुनिया भर के वैज्ञानिक चिंतित हैं। जानें अगर "आइस एज" आया तो क्या होगा?
इस साल गर्मी से लोग काफी परेशान रहे, तो वहीं मानसून की बारिश ने भी पहाड़ों और कुछ मैदानी इलाकों में खूब तबाही मचाई। अब इन दो मौसम की मार झेलने के बाद कड़ाके की ठंड के लिए तैयार रहें। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है।
पिछले कई वर्षों में मानसून ने अपनी दशा और दिशा दोनों बदल ली है। तेज बारिश और बाढ़ तो कहीं सूखा, कहीं बादल फटने की घटनाएं तो कहीं लैंडस्लाइड, आखिर मानसून ने क्यों अपनी चाल बदली है? जानें...
ग्लोबल वॉर्मिंग पर अगर अभी ध्यान नहीं दिया गया और इससे निपटने के उपाय नहीं खोजे गए तो हालात भयावह हो सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक सदी के अंत तक हिंदू कुश हिमालय के ग्लेशियर की बर्फ 75 फीसदी तक कम हो सकती है।
WMO की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-2029 के बीच वैश्विक तापमान के 1.5°C की सीमा पार करने की 70% संभावना है। यह जलवायु परिवर्तन के गंभीर नतीजों को दिखाता है, जिससे पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और मानव जीवन प्रभावित हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने रिसर्च रिपोर्ट में बताया है कि पृथ्वी से ऑक्सीजन खत्म हो जाएगा और ऐसे में जीवन भी समाप्त हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने इस दावे से संबंधित रिपोर्ट जारी की है। जानिए इस रिपोर्ट में क्या है?
कई देशों पर बर्फीली आफत मंडरा रही है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह ठंड इतनी खतरनाक हो सकती है कि सामान्य जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो सकता है।
दिसंबर का महीना शुरू हो गया लेकिन इस बार अबतक कड़ाके की ठंड नहीं पड़ रही है। अगर ध्यान दें तो इस बार वसंत भी रूठा-रूठा ही रहा। मौसम क्यों ऐसा बर्ताव कर रहा, विश्व मौसम विज्ञान ने दी है चेतावनी, जानें पूरी खबर-
बर्फीले रेगिस्तान कहे जाने वाले 'अंटार्कटिका' में हरित क्षेत्र बढ़ने से वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 से 2021 के बीच अंटार्कटिका में बर्फ भी तेजी से पिघली है। इसके बाद से अंटार्कटिका में कई चिंताजनक निष्कर्ष सामने आए हैं।
1987 से 2021 तक मुंबई में समुद्र के स्तर में अधिकतम वृद्धि देखी गई जो 4.440 सेमी है। इसके बाद हल्दिया में 2.726 सेमी, विशाखापत्तनम में 2.381 सेमी, कोच्चि में 2.213 सेमी, पारादीप में 0.717 सेमी और चेन्नई में 0.679 सेमी की वृद्धि समुद्र के जल स्तर में हुई।
हमारी धरती अपनी चाल बदल रही है। इस वजह से अब दिन लंबे होंगे और रातें छोटी हो जाएंगी। पोलर रीजन में बर्फ पिघलने की रफ्तार तेज होने से पृथ्वी की गति पर पड़ रहा है। जानिए और क्या-क्या बदलेगा?
हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में वायु प्रदूषण से भारत में 21 लाख लोगों की मौत हो गई। 2021 में होने वाली मौत के मामलों की संख्या किसी भी पिछले साल के अनुमान से ज़्यादा रही थी।
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने बड़ी बात कही है। स्टील ने कहा है कि ग्लोबल वॉर्मिंग से पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है और सिर्फ दो साल ही बचे हैं।
पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी बज रही है। ग्लोबल वार्मिंग को लेकर बड़ी बात सामने आई है। यूएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल वैश्विक गर्मी के रिकॉर्ड "टूट गए" थे, 2023 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म दशक रहा।
दुनिया में समय से पहले ही वसंत ऋतु का आगमन हो गया है। जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसमी चेंजेस आ रहे हैं। वसंत ऋतु का ही प्रभाव है कि जापान से मैक्सिको तक फूल जल्दी खिल गए हैं। यूरोप में जो स्कीइंग करने वाले रिजॉर्ट हैं, वहां बर्फ गायब हो चुकी है।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जिस तरह से आर्कटिक का बर्फ पिघल रहा है उससे 48,500 साल पुराना वायरस जोंबी जो समुद्र की सतह में छिपा है, फिर से एक्टिव हो सकता है। जानिए पूरी डिटेल्स-
पत्रिका ‘एनर्जीस’ में प्रकाशित एक स्टडी में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से उपजी परिस्थितियों के कारण आने वाले 100 सालों में 100 करोड़ लोगों की जान जा सकती है।
नासा के मुताबिक इस साल जुलाई महीने में साल 1880 के बाद सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण कार्बन उत्सर्जन के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन को बताया गया है।
अंटार्कटिका की पिघलती बर्फ ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए हैं। यह महाविनाश का संकेत तो नहीं। क्या आगामी समय में धरती और अधिक गर्म होने वाली है, क्या धरती फिर से आग का गोला बनेगी। लगातार तेजी से गर्म होता तापमान वैसे भी शुभ संकेत नहीं दे रहा।
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