23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को भारत पहुंच चुके हैं। एयरपोर्ट पर पुतिन का कैसे हुआ है स्वागत? आइए जानते हैं हमारी इस खबर में।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अपनी भारत यात्रा शुरू करेने के पहले ही बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ क्रेमलिन में चली वार्ता चुनौतीपूर्ण रही।
व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले रूसी नर्तकों का पंजाबी गाने पर डांस करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली में आईटीसी मौर्या होटल में ठहर रहे हैं। उनके आगमन से पहले होटल में पूरी सुरक्षा व्यवस्था तैनात कर दी गई है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। उनकी इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर है। इस बीच ये खबर सामने आ गई है कि उन्हें एयरपोर्ट पर रिसीव करने कौन सा नेता जाएगा।
बिहार में जन्मे रूसी विधायक अभय सिंह ने कहा है कि वह चाहते हैं कि भारत S-500 एयर-डिफेंस सिस्टम के लिए ज़ोर दे, क्योंकि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को 23वें भारत-रूस सालाना समिट के लिए दिल्ली आने वाले हैं।
भारत और रूस एक दूसरे के सुख दुख के साथी रहे हैं। दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि हर बड़े राष्ट्रीय संकट के दौरान साबित हुई है। जानिए कितनी पुरानी और प्रगाढ़ है भारत और रूस की दोस्ती?
रूस के साथ बढ़ते आर्थिक रिश्तों के बीच भारत एक बड़े व्यापारिक बदलाव की तैयारी में है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा से पहले सरकार तेज़ी से कोशिशों में जुट गई है कि रूस और उसके नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के विशाल बाज़ार में भारत की एंट्री आसान हो।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बृहस्पतिवार को अपने दोस्त और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के लिए पीएम आवास पर राजकीय हाई डिनर की मेजबानी करेंगे। इसके अगले दिन शुक्रवार को हैदराबाद हाउस में वह पुतिन के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता में शामिल होंगे।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की नई दिल्ली की यात्रा के दौरान रूस और भारत के बीच बृहस्पतिवार को बड़ी रक्षा बैठक होने जा रही है। इससे भारत को हथियारों की आपूर्ति तेज होगी। दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
व्लादिमीर पुतिन दुनिया के सबसे शक्तिशाली और रहस्यमय नेताओं में गिने जाते हैं। समय-समय पर उनकी संपति को लेकर भी कई तरह के दावे सामने आते हैं।
भारत और रूस के बीच बड़ा सैन्य समझौता होने वाला है। इसका संकेत खुद रूस ने दिया है। राष्ट्रपति पुतिन के 4 दिसंबर को भारत दौरे से पहले इस सैन्य समझौते की रूपरेखा सामने आ सकती है।
भारत की सस्ती तेल सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। अब तक रूस से मिलने वाले डिस्काउंटेड क्रूड ने भारत की जेब को राहत दी है लेकिन अमेरिका के नए प्रतिबंधों ने इस लाइफलाइन को हिला कर रख दिया है। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि आने वाले हफ्तों में भारत की रूसी तेल आयात पर बड़ी चोट पड़ सकती है।
रूस ने राष्ट्रपति पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से पहले भारत को 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट देने का खुला ऑफर किया है। रूस ने कहा है कि वह भारत को सारी तकनीकि खुले तौर पर देने को तैयार है।
भारत और रूस के बीच बढ़ती नजदीकियां अब सिर्फ ऊर्जा सौदों तक सीमित नहीं रहीं। पहले सस्ता कच्चा तेल, फिर एलएनजी की सप्लाई बढ़ाने का प्रस्ताव… और अब रूस ने भारत को समुद्री क्षेत्र में एक और बड़ा ऑफर देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है।
मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाएं पहुंचाईं और आगामी भारत-रूस शिखर सम्मेलन पर चर्चा की। SCO बैठक में जयशंकर ने आतंकवाद पर भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति दोहराई और संगठन से मूल सिद्धांतों पर कायम रहने की अपील की।
जयशंकर का यह दौरा न केवल एससीओ जैसे क्षेत्रीय मंचों को मजबूत करेगा, बल्कि पुतिन की यात्रा के लिए जमीन तैयार करेगा। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, जयशंकर रूस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी भेंट करेंगे और रूस-भारत मंच 2025 जैसे कार्यक्रमों पर चर्चा करेंगे।
अमेरिका के दबाव और रूस पर लगे कड़े प्रतिबंधों के बावजूद भारत और रूस की ऊर्जा साझेदारी पहले से ज्यादा मजबूत होती दिख रही है। रूस के भारत में राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि रूस ने भारत के लिए एक भरोसेमंद एनर्जी पार्टनर के रूप में खुद को साबित किया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर विदेश मंत्रालय ने साफ संदेश दिया है और अपनी स्थिति फिर से स्पष्ट कर दी है। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी दुनिया के सामने अपनी बात रख चुके हैं।
एशियाई बाजार में रूसी तेल एक बार फिर भारी छूट पर बिक रहा है। भारत और चीन ने हाल ही में रूसी कच्चे तेल की खरीद घटा दी है, जिसके चलते रूस के लिए यह स्थिति गंभीर आर्थिक दबाव का कारण बन गई है।
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