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रूस और भारत के बीच कल होगी बड़ी रक्षा बैठक, S-400 से लेकर लड़ाकू विमान और अभेद्य हथियार होंगे एजेंडा

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Dec 03, 2025 09:11 pm IST,  Updated : Dec 03, 2025 09:12 pm IST

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की नई दिल्ली की यात्रा के दौरान रूस और भारत के बीच बृहस्पतिवार को बड़ी रक्षा बैठक होने जा रही है। इससे भारत को हथियारों की आपूर्ति तेज होगी। दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

पीएम मोदी (बाएं) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन (दाएं)- India TV Hindi
पीएम मोदी (बाएं) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन (दाएं) Image Source : AP

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली शिखर वार्ता के एक दिन पहले ही भारत और रूस के बीच सबसे बड़ी रक्षा बैठक होने जा रही है। बृहस्पतिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी समकक्ष आंद्रे बेलौसोव के बीच होने वाली इस उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर होगी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की अतिरिक्त खरीद, सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करना और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों की शीघ्र डिलीवरी सुनिश्चित करना रहेगा। 

हथियारों की आपूर्ति में आएगी तेजी

भारत और रूस के बीच होने वाली इस बैठक का एजेंडा पूर्व की डील में हथियारों की आपूर्ति में तेजी लाना भी रहेगा। शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने बताया कि दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत रक्षा साझेदारी को यह द्विपक्षीय वार्ता और अधिक मजबूत होगी। इस दौरान रूस से क्रिटिकल स्पेयर्स और पुर्जों की समयबद्ध आपूर्ति पर विशेष जोर दिया जाएगा। बेलौसोव पुतिन के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे, जिसमें रक्षा निर्यात कंपनी रोसोबोरोन एक्सपोर्ट के प्रमुख, सेबरबैंक, रोसनेफ्ट और गैजप्रोम जैसे प्रमुख उद्योग समूहों के सीईओ शामिल हैं। यह वार्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच 5 दिसंबर को होने वाली 23वीं वार्षिक शिखर बैठक से पूर्व होगी। भारतीय पक्ष लंबे समय से चली आ रही डिलीवरी देरी की शिकायतों को दूर करने पर दृढ़ता से बात करेगा। सशस्त्र बलों का कहना है कि रूस से महत्वपूर्ण पुर्जों की देरी से रूसी मूल के सैन्य प्लेटफॉर्म्स का रखरखाव प्रभावित हो रहा है। 

 

एस-400 पर पर नजर

इस दौरान भारत और रूस के बीच एस-400 की आपूर्ति को लेकर भी अहम वार्ता होनी है। रूस ने कुछ एस-400 बैटरियों की डिलीवरी 2026-27 वित्तीय वर्ष तक पूरी करने का आश्वासन दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मई 2025 में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान एस-400 ने स्वॉर्म ड्रोन्स और मिसाइलों को नष्ट करने में 'गेम चेंजर' की भूमिका निभाई थी। इसी कारण भारत अतिरिक्त पांच स्क्वाड्रन (कुल 10 डिवीजन) और 300 अतिरिक्त मिसाइलों की खरीद पर विचार कर रहा है। 2018 के 5.4 बिलियन डॉलर के सौदे के तहत पांच यूनिट्स की खरीद हुई थी, जिसमें से तीन तैनात हैं। शेष दो नवंबर 2026 तक मिलेंगे। 


भारत को अब चाहिए एस-500

अमेरिकी सीएएटीएसए प्रतिबंधों की चेतावनी के बावजूद भारत ने रूस के साथ कई अहम रक्षा सौदा किया है।  इस बार की बैठक में रूस की अगली पीढ़ी की एस-500 प्रणाली (600 किमी रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर) की खरीद पर औपचारिक चर्चा शुरू हो सकती है। यह सिस्टम चीन की छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से निपटने के लिए भारत के एयर डिफेंस को मजबूत करेगा। इसके अलावा, सुखोई-30 अपग्रेड, जहाज निर्माण सहयोग और संयुक्त हथियार विकास पर भी बात होगी। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि पांचवीं पीढ़ी के सु-57 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की संभावना पर चर्चा हो सकती है। भारत राफेल, एफ-21, एफ/ए-18 और यूरोफाइटर जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है, लेकिन सु-57 को अस्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।


मोदी-पुतिन के बीच होगी अहम बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मौदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच 5 दिसंबर को अहम वार्ता होनी है। दोनों नेताओं में जिगरी दोस्ती है। मोदी-पुतिन शिखर बैठक में भारत-रूस रक्षा संबंधों की समग्र समीक्षा होगी। दोनों देश प्रतिवर्ष एक शिखर बैठक आयोजित करते हैं, जिसमें राजनीति, व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा के सभी पहलुओं पर चर्चा होती है। अब तक मोदी और पुतिन के बीच भारत व रूस में 22 बैठकें हो चुकी हैं। पुतिन का पिछला दौरा 2021 में था, जबकि मोदी जुलाई 2024 में मॉस्को गए थे। इस बार प्रतिनिधिमंडल व्यापक होगा। बैठक में ऊर्जा निर्यात, नागरिक परमाणु सहयोग (कुडनकुलम प्लांट विस्तार) और अमेरिकी प्रतिबंधों से व्यापार बचाने के उपाय एजेंडे पर रहेंगे। यह दौरा यूक्रेन युद्ध के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने का प्रतीक है।

अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत रूस से तेल आयात बढ़ा रहा है (2025 में 68.7 बिलियन डॉलर व्यापार) और रक्षा निर्भरता कायम रखे हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने में सहायक होगी। रूस ने पहले ही रक्षा सौदों पर संसदीय मंजूरी दे दी है। (भाषा)

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