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भारत और रूस के बीच होने वाला है सबसे बड़ा सैन्य समझौता, पुतिन के नई दिल्ली दौरे से पहले लिखी जाएगी दोस्ती की नई इबारत

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Nov 29, 2025 12:01 pm IST,  Updated : Nov 29, 2025 12:04 pm IST

भारत और रूस के बीच बड़ा सैन्य समझौता होने वाला है। इसका संकेत खुद रूस ने दिया है। राष्ट्रपति पुतिन के 4 दिसंबर को भारत दौरे से पहले इस सैन्य समझौते की रूपरेखा सामने आ सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन (दाएं)- India TV Hindi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन (दाएं) Image Source : AP

मॉस्को: राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से पहले भारत और रूस दोस्ती की नई इबारत लिखने जा रहे हैं। भारत और रूस के बीच अब तक का सबसे बड़ा सैन्य समझौता हो सकता है। भारत और रूस के बीच यह संभावित सैन्य समझौता पाकिस्तान से लेकर चीन तक के लिए और अमेरिका के लिए भी चिंता का सबब बन सकता है। 

रूसी संसद के निचले सदन ‘स्टेट डूमा’ ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चार-पांच दिसंबर को होने वाली भारत यात्रा से ठीक पहले भारत के साथ एक महत्वपूर्ण सैन्य समझौते को मंजूरी देने की अंतिम तैयारी कर ली है। यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित ‘रेसीप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट’ (RELOS) है। इस साल 18 फरवरी को मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार और रूस के तत्कालीन उप रक्षा मंत्री कर्नल जनरल अलेक्जेंडर फोमिन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, स्टेट डूमा ने रेलोस दस्तावेज को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर संसदीय पुष्टि के लिए अपलोड कर दिया है। 

 

भारत और रूस की सैन्य साझेदारी होगी मजबूत

सरकार की ओर से दिए गए नोट में कहा गया है कि यह समझौता रूस-भारत सैन्य सहयोग को और मजबूत करेगा तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच परस्पर लॉजिस्टिक सहायता को सरल बनाएगा। रेलोस समझौते से संयुक्त सैन्य अभ्यास, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों, पोतों की मरम्मत, ईंधन भराई तथा चिकित्सा सहायता के लिए एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का उपयोग आसान हो जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ आर्कटिक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में होगा। रूसी दैनिक इज्वेस्तिया के मुताबिक, समझौते के प्रावधान आर्कटिक क्षेत्र में संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों पर भी लागू होंगे। 

 

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगा भारत का दबदबा

रूस के साथ यह महत्वपूर्ण सैन्य समझौता होने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत का दबदबा बढ़ेगा। भारतीय नौसेना के तलवार-श्रेणी फ्रिगेट और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य कठिन आर्कटिक परिस्थितियों में भी संचालन करने में सक्षम हैं। अब ये पोत रूसी उत्तरी बेड़े के बंदरगाहों में लॉजिस्टिक सहायता प्राप्त कर सकेंगे। दूसरी ओर, रूसी नौसेना भारतीय नौसैनिक अड्डों का उपयोग कर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा सकेगी, जिसे विशेषज्ञ चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ संतुलन के रूप में देख रहे हैं। रूस ने अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और वियतनाम जैसे देशों के साथ इसी तरह के लॉजिस्टिक समझौते पहले ही कर रखे हैं। 

 

भारत को मिलेगा और अधिक एस-400

ऑपरेशन सिंदूर में कमाल दिखाने वाले रूस के एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 की भारत को और अधिक जरूरत है। पुतिन की भारत यात्रा के बाद और अधिक एस-400 मिलने की उम्मीद की जा रही है। भारत के साथ यह समझौता दोनों देशों के बीच 2003 से चले आ रहे अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-MTC) के तहत सैन्य-तकनीकी सहयोग को नया आयाम देगा। पुतिन की 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता के दौरान इस समझौते की औपचारिक पुष्टि होने की पूरी संभावना है। इससे पहले दोनों देश एस-400 वायु रक्षा प्रणाली, ब्रह्मोस मिसाइल, एके-203 राइफल संयुक्त उत्पादन जैसे बड़े रक्षा सौदों को सफलतापूर्वक लागू कर चुके हैं। (भाषा)

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