1. Hindi News
  2. उत्तर प्रदेश
  3. इफ्तार के बाद बचा हुआ मांसाहारी भोजन गंगा में फेंकने का मामला, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 8 आरोपियों को दी जमानत, जानें क्या कहा

इफ्तार के बाद बचा हुआ मांसाहारी भोजन गंगा में फेंकने का मामला, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 8 आरोपियों को दी जमानत, जानें क्या कहा

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : May 18, 2026 06:49 am IST,  Updated : May 18, 2026 06:58 am IST

वाराणसी में गंगा नदी में मांसाहारी भोजन फेंकने के मामले पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 8 आरोपियों को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि गंगा नदी में बचा हुआ मांसाहारी भोजन फेंकने से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती थीं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट- India TV Hindi
इलाहाबाद हाई कोर्ट Image Source : FILE (PTI)

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी में एक नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान बचा हुआ मांसाहारी भोजन फेंकने के आरोपी 8 लोगों को जमानत दे दी है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि गंगा नदी में बचा हुआ मांसाहारी भोजन फेंकने से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती थीं। हालांकि, आरोपियों द्वारा जताए गए खेद और उनके साफ आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए अदालत ने उन्हें राहत दी है।

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?

न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला ने 15 मई को 5 आरोपियों- मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल आफरीदी, मोहम्मद तौसीफ अहमद और मोहम्मद अनस की जमानत मंजूर की। आदेश जारी करते हुए न्यायमूर्ति शुक्ला ने कहा, "आरोपी अपने कृत्य के लिए खेद व्यक्त कर चुके हैं और उनके परिवारों ने भी समाज को हुई पीड़ा पर अफसोस जताया है। मामले के समस्त तथ्यों और परिस्थितियों, आरोपियों का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड न होने, अब तक जेल में बिताई गई अवधि और उनके द्वारा जताए गए खेद के मद्देनजर प्रथम दृष्टया जमानत दी जानी चाहिए।"

इसी मामले में एक अन्य सुनवाई के दौरान 15 मई को ही न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने तीन अन्य आरोपियों- मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान को भी जमानत दे दी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला इसी साल मार्च महीने का है। 15 मार्च को वाराणसी में गंगा नदी के बीच एक नाव पर मुस्लिम समुदाय के कुछ सदस्यों द्वारा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। आरोप है कि इस पार्टी के दौरान मांसाहारी भोजन किया गया और बचा हुआ खाना गंगा नदी में फेंक दिया गया। इस घटना के खिलाफ 16 मार्च को भाजपा युवा मोर्चा के वाराणसी अध्यक्ष रजत जायसवाल ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि पवित्र नदी में इस तरह मांसाहारी भोजन फेंकने से हिंदू समुदाय की आस्था को गहरी ठेस पहुंची है।

BNS की धाराओं के तहत दर्ज हुआ था मामला

शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें मुख्य रूप से पूजा स्थल को अपवित्र करने और धार्मिक भावनाएं भड़काने से संबंधित कानूनी प्रावधान शामिल हैं।

इस मामले में आरोपी 17 मार्च से जेल में बंद थे। इससे पहले 1 अप्रैल को वाराणसी की एक सत्र अदालत ने यह कहते हुए उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि यह कार्य सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से किया गया था।

ये भी पढ़ें-

'अपनी भाषा और व्यवहार में संतुलन और संयम बरतें', अखिलेश यादव ने राजकुमार भाटी को दी सलाह

योगी सरकार के 8 नए मंत्रियों को मिले विभाग, भूपेंद्र चौधरी बने MSME मंत्री, जानिए बाकी को मिली कौन सी जिम्मेदारी?

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। उत्तर प्रदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।