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'घर सूने हो रहे और वृद्धाश्रम बढ़ रहे, यह मन को व्यथित करता है', विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस पर सीएम योगी की पाती

 Reported By: Vishal Singh Edited By: Shakti Singh
 Published : Jun 15, 2026 08:32 am IST,  Updated : Jun 15, 2026 08:32 am IST

सीएम योगी ने लिखा कि वृद्धजन को अपनत्व को होती है जरूरत, लेकिन उन्हें अपनों का दुर्व्यवहार सहन करना पड़ता है। उन्होंने भगवान गणेश का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपने माता-पिता को ही संसार मानकर उनकी परिक्रमा की थी।

Yogi Adityanath- India TV Hindi
योगी आदित्यनाथ Image Source : PTI

विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम ने पाती लिखी है। प्रदेशवासियों के नाम लिखी चिट्ठी में उन्होंने कहा कि आज घर सूने हो रहे और वृद्धाश्रम बढ़ रहे हैं, यह मन को व्यथित करता है। सीएम योगी ने श्रवण कुमार और भगवान राम का जिक्र कर प्रदेशवासियों को माता-पिता की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में माता-पिता और गुरु को साक्षात ईश्वर माना गया है। सीएम योगी ने कहा कि वृद्धजनों के सम्मान, स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

सीएम योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार वृद्धजनों और निराश्रित महिलाओं को ₹1500 प्रतिमाह पेंशन देगी। निराश्रित महिलाओं को आयुष्मान भारत और आवास योजनाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को बीमारियों से बचने के लिए योग का सहारा लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस साल 21 जून को योग दिवस की थीम भी 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' रखी गई है।

सीएम योगी की पाती

मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों, आज घर सूने हो रहे हैं और वृद्धाश्रम बढ़ रहे है। यह तथ्य मन को व्यथित करता है। यह स्थिति क्यों आई? आज विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरुकता दिवस पर एक संवेदनशील नागरिक होने के नाते हमें इस पर विचार करना चाहिए।

बाल-बच्चों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सर्वस्व अर्पित करने वाले उम्र के चौथे पड़ाव पर अकेले पड़ जाते हैं। आज की जीवनशैली में युवा घर से दूर काम करते हैं। इच्छा होने पर भी वृद्ध माता-पिता की सेवा के लिए घर में कोई नहीं होता। उम्र के अमृतकाल में वृद्धजनों को अपनत्व की सर्वाधिक आवश्यकता होती है। दुर्भाग्य से समाज ऐसे समय का साक्षी बन रहा है, जब अपनों का दुर्व्यवहार भी उन्हें सहना पड़‌ता है। देश के सर्वोच्च न्यायालय तक को अपने आदेशों में उन मूल्यों एवं दायित्वों का स्मरण कराना पड़ रहा है, जो सनातन का मूलभाव है।

सनातन संस्कृति में माता-पिता और गुरु को साक्षात ईश्वर माना जाता है। आपने भगवान शिव और माता पार्वती की कथा सुनी होगी। उन्होंने अपने पुत्रों भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के समक्ष समस्त जगत की परिक्रमा की चुनौती रखी। तब, भगवान गणेश ने माता-पिता को ही संपूर्ण सृष्टि मानकर उनकी परिक्रमा कर ली। उन्होंने यह संदेश दिया कि माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोकों एवं तीरथों का वास है। बुद्धि, श्रद्धा एवं संस्कार से परिपूर्ण इसी दृष्टिकोण ने भगवान गणेश को प्रथम पूज्य होते का गौरव प्रदान किया। श्रवण कुमार की कथा तो हम सभी को ज्ञात हैं। भगवान श्रीराम तो माता-पिता का मान रखने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार करने से भी विचलित नहीं हुए।

सनातन धार्मिक रीति-रिवाजों, सामाजिक परंपराओं, पारिवारिक संबंधों एवं मूल्यों पर आधारित जीवनशैली है। सनातन में बड़ों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने की परंपरा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि वे हमारे अनुभव, संस्कृति और जीवन मूल्यों के सच्चे धरोहर है। वृद्धजनों का सम्मान केवल संस्कार नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली सभ्यता की पहचान है।

वृद्धजनों और निराश्रित महिलाओं का सम्मानपूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के लिए ही प्रदेश सरकार ने ₹1,500 प्रति माह पेंशन देने का निर्णय लिया है। निराश्रित महिलाओं को आयुष्मान आरत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि वे गरिमापूर्ण जीवन व्यतीत कर सकें। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना का भी लाभ मिलेगा।

मैं सभी वृद्धजनों से आदरपूर्वक कहना चाहूंगा कि आपने परिवार, समाज और देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है। शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग अवश्य अपनाएं। संयोग से इस वर्ष 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' की थीम भी 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' हैं। यह केवल एक थीम नहीं, बल्कि वृद्धजनों के सम्मान, स्वास्थ्य और गरिमापूर्ण जीवन का वैश्विक संकल्प है।

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