उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ताजमहल को लेकर एक बार फिर से विवाद गहरा गया है। ताजमहल के परिसर में भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर के होने का दावा किया जा रहा है। अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI से इस विवाद को लेकर दाखिल याचिका पर जवाब मांगा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट में ये याचिका आगरा जनपद कोर्ट के आदेशों के खिलाफ दायर की गई है। आगरा में दीवानी न्यायाधीश और अपर जिला न्यायाधीश ने विवादित परिसर का सर्वे करने के लिए अधिवक्ता आयोग का गठन करने का फैसला पारित करने से इनकार कर दिया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान वकील हरिशंकर जैन ने दलील दी है कि उनके आवेदन को गलत तरीके से खारिज किया गया था। इसके बाद उनकी पुनरीक्षण याचिका को भी ये कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि ये सुनवाई योग्य नहीं है, जबकि इस विवाद पर फैसले के लिए ये जरूरी है।
हाई कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
वकील हरिशंकर जैन की दलील को सुनने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने केंद्र सरकार और ASI को इस मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं, कोर्ट ने इस मामले में चौथे प्रतिवादी पंकज कुमार वर्मा को भी नोटिस जारी कर दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, ये पूरा विवाद 2015 में सामने आया था। एक वाद दायर किया गया था जिसमें मांग की गई है कि ताजमहल परिसर में भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर होने की घोषणा की जाए। जानकारी के अनुसार, ये वाद आगरा के दीवानी न्यायाधीश की कोर्ट में पेंडिंग है। इसके बाद मामले में अधिवक्ता आयोग गठित करने का भी अनुरोध किया गया था। हालांकि, जनपद की दोनों कोर्ट ने इस पर आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है।
आपको बता दें कि ये याचिका भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर और हरि शंकर जैन और चार अन्य लोगों द्वारा दायर की गई है। इस मामले में केंद्र सरकार और ASI समेत दो और प्रतिवादी पक्षकार हैं। (इनपुट: भाषा)
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