उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में एक निजी अस्पताल पर इलाज के नाम पर कथित मनमानी वसूली का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। महज चार घंटे के इलाज के लिए 55 हजार रुपये का बिल थमाने की शिकायत मिलते ही प्रशासन हरकत में आया, जिसके बाद अस्पताल संचालक ताला लगाकर फरार हो गया।
मामला मऊ के भीटी बाजार स्थित द पॉपुलर अस्पताल का है। आरोप है कि बलिया की रहने वाली एक महिला अपनी फूड प्वाइजनिंग से पीड़ित बेटी को इलाज के लिए मऊ लेकर आई थी। पहले उसका इलाज जिला अस्पताल बलिया में हुआ, लेकिन वहां से रेफर किए जाने के बाद एक निजी एंबुलेंस चालक ने बेहतर इलाज का भरोसा देकर उन्हें द पॉपुलर अस्पताल पहुंचा दिया।
भर्ती करते ही मांगे 10 हजार एडवांस
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती के समय 10 हजार रुपये एडवांस जमा कराया गया। इसके अलावा जांच और ब्लड सैंपल के नाम पर 2700 रुपये अलग से लिए गए। करीब चार घंटे बाद अस्पताल मैनजेमेंट ने इलाज का कुल बिल 55 हजार रुपये बता दिया और आरोप है कि भुगतान किए बिना मरीज को छोड़ने से इनकार कर दिया।
शिकायत मिलते ही CMO ने किया हस्तक्षेप
मामले की जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी CMO डॉ. पंकज कुमार राय तक पहुंची तो उन्होंने तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल भेजा। शुरुआती दौर में अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को छोड़ने से मना कर दिया, लेकिन विभाग के दोबारा हस्तक्षेप के बाद आखिरकार बिना अतिरिक्त राशि लिए मरीज को डिस्चार्ज करना पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील करने की तैयारी की, लेकिन कार्रवाई की सूचना मिलते ही संचालक अस्पताल बंद कर मौके से गायब हो गया। जांच में पता चला कि अस्पताल किराए के भवन में बिना आवश्यक पंजीकरण और मानकों के संचालित किया जा रहा था। भवन मालिक ने स्वास्थ्य विभाग को लिखित रूप से भरोसा दिया है कि दो दिन के भीतर अस्पताल पूरी तरह खाली करा दिया जाएगा।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
CMO के मुताबिक, यही अस्पताल पहले एपेक्स नाम से संचालित होता था और उस समय भी इसे सील किया गया था। बाद में नाम बदलकर दोबारा संचालन शुरू कर दिया गया, लेकिन इस बार भी अस्पताल आवश्यक अनुमति के बिना चलता मिला। डॉ. पंकज कुमार राय ने कहा कि मऊ में कार्यभार संभालने के बाद एक महीने के भीतर यह 10वां अवैध अस्पताल है, जिस पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में बिना पंजीकरण और निर्धारित मानकों के कोई भी अस्पताल संचालित नहीं होने दिया जाएगा। ऐसे संस्थानों के खिलाफ आगे भी लगातार अभियान जारी रहेगा।
(रिपोर्ट:राकेश)
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