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बड़ा अजीबोगरीब है ये जीव, खाना पचाने के लिए निगल लेता है कंकड़-पत्थर और रेत

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Apr 26, 2026 11:55 pm IST,  Updated : Apr 26, 2026 11:59 pm IST

शुतुरमुर्ग का पाचन सिस्टम, दांत नहीं होने के बावजूद बहुत अनोखा है। यह पत्थर और रेत निगलकर खाना पीसता है। गिजार्ड में इकट्ठा हुए ये पत्थर ‘प्राकृतिक दांत’ के रूप में काम करते हैं और उसके सख्त भोजन को आसानी से पचा देते हैं।

ostrich digestion facts- India TV Hindi
शुतुरमुर्ग की पाचन क्रिया के बारे में दिलचस्प बात जानिए। Image Source : PEXELS (प्रतीकात्मक फोटो)

विश्व के सबसे बड़े पक्षियों में शुमार शुतुरमुर्ग अपनी अनूठी शारीरिक बनावट और खाने-पीने की आदतों के लिए मशहूर है। दरअसल, शुतुरमुर्ग की चोंच में दांत नहीं होते, इसी वजह से वह अपने खाने को चबाने के बजाय सीधे निगल लेते हैं। लेकिन फिर भी, खाने को बिना चबाए पचाना उसके लिए कोई मुश्किल काम नहीं होता है, क्योंकि कुदरत ने शुतुरमुर्ग को एक स्पेशल पाचन प्रणाली दी होती है।

खास तरीके से खाना पचाता है शुतुरमुर्ग

American Ostrich Farms में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, शुतुरमुर्ग खाने को पचाने के लिए रेत और कंकड़-पत्थर निगल लेता है। ये पत्थर शुतुरमुर्ग के पेट के एक खास हिस्से ‘गिजार्ड’ में जाकर इकट्ठा हो जाते हैं, जो खाने को पचाने में महत्वपूर्ण रोल निभाता है। बता दें कि गिजार्ड एक मांसल थैली जैसी होती है, जो सिकुड़ती रहती है और शुतुरमुर्ग के निगले पत्थरों को ‘दांतों’ के जैसे प्रयोग करती है।

शुतुरमुर्ग का गिजार्ड ऐसे करता है काम

जब शुतुरमुर्ग खाना निगलता है, तो यह गिजार्ड उन पत्थरों की सहायता से उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है। खासतौर पर बीजों, सख्त पौधों और रेशेदार भोजन को पीसने में शुतुरमुर्ग के लिए यह प्रक्रिया बहुत जरूरी होती है। यही कारण है कि दांतों के बिना भी शुतुरमुर्ग आसानी से अपना खाना पचा लेता है।

1 किलोग्राम तक पत्थर निगल लेता है शुतुरमुर्ग

रिपोर्ट के मुताबिक, एक शुतुरमुर्ग अपने गिजार्ड में लगभग 1 किलोग्राम तक पत्थर इकट्ठा कर सकता है। ये पत्थर वक्त के साथ घिस जाते हैं और चिकने हो जाते हैं। फिर, शुतुरमुर्ग नए पत्थर निगल लेते हैं। यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जो शुतुरमुर्ग के पाचन तंत्र को सुचारु बनाती है।

यह अनूठी व्यवस्था हमें दिखाती है कि कुदरत ने दुनिया में मौजूद हर जीव को उसकी जरूरतों और वातावरण के मुताबिक खास तरीके से विकसित किया है। शुतुरमुर्ग भी इसका एक उदाहरण है।

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