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किशोरी से रेप-हत्या की SIT जांच के आदेश को बंगाल सरकार ने दी चुनौती, जानिए क्यों

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : May 17, 2023 10:41 pm IST,  Updated : May 17, 2023 10:41 pm IST

टीएमसी के नेतृत्व ने एसआईटी के गठन पर आपत्ति जताई। विशेष रूप से दत्ता को सदस्य के रूप में शामिल करने पर, क्योंकि वह हाल के दिनों में राज्य सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर विभिन्न समाचार चैनलों में काफी मुखर रहे।

कलकत्ता हाई कोर्ट - India TV Hindi
कलकत्ता हाई कोर्ट Image Source : FILE PHOTO

पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के कलियागंज में एक नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में ममता सरकार ने SIT जांच के आदेश को चुनौती दी है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने एकल न्यायाधीश की पीठ के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि दो सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों को तीन सदस्यीय एसआईटी में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

एसआईटी के गठन पर टीएमसी के नेतृत्व की आपत्ति

मामले में 11 मई को राज्य पुलिस की ओर से जांच की धीमी प्रक्रिया पर निराशा व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की खंडपीठ ने कोलकाता पुलिस की विशेष आयुक्त दमयंती सेन, सेवानिवृत्त आईजी पंकज दत्ता और सीबीआई के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक उपेन बिस्वास को शामिल करते हुए एसआईटी के गठन का आदेश दिया। टीएमसी के नेतृत्व ने एसआईटी के गठन पर आपत्ति जताई। विशेष रूप से दत्ता को सदस्य के रूप में शामिल करने पर, क्योंकि वह हाल के दिनों में राज्य सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर विभिन्न समाचार चैनलों में काफी मुखर रहे।

पीड़िता के शव का दूसरा पोस्टमार्टम कराने का भी अधिकार

राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति मंथा के आदेश को चुनौती देने के लिए एक खंडपीठ में जाने का फैसला किया। न्यायमूर्ति मंथा ने एसआईटी को यह भी अधिकार भी दिया कि यदि टीम के सदस्य जरूरी समझें तो पीड़िता के शव का दूसरा पोस्टमार्टम करा सकते हैं। उन्होंने राज्य पुलिस को केस डायरी सहित मामले से जुड़े सभी दस्तावेज जल्द से जल्द एसआईटी को सौंपने का भी निर्देश दिया। पुलिस को अगली सुनवाई से पहले इस मामले में शुरुआती जांच रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया गया है।

25 अप्रैल को नाबालिग लड़की के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के खिलाफ स्थानीय लोगों के हिंसक विरोध के बाद कलियागंज के कुछ हिस्सों को युद्ध के मैदान में बदल दिया गया था। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने सबूत मिटाने की नीयत से शव को वहां से फौरन हटा दिया। किशोरी के शव को घसीटते हुए देखे जाने के बाद चार एएसआई को निलंबित कर दिया गया था।

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