इस्लामाबाद: पाकिस्तान के एक दैनिक ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान की सैन्य अदालतें बेहद गोपनीय, शक्तिशाली व पूर्णत: गैर जिम्मेदार हैं। द नेशन ने 'अनब्रिडल्ड मिल्रिटी कोर्ट्स' नामक एक संपादकीय में कहा कि पाकिस्तान का सर्वोच्च न्यायालय सैन्य अदालतों को मंजूरी की मुहर लगा सकता था, लेकिन बिना किसी प्रावधान के उसने ऐसा नहीं किया।
लेख के मुताबिक, "13 में से आठ न्यायाधीशों ने कहा कि इन अदालतों द्वारा सुनवाई कुछ सुरक्षा उपायों के अधीन होने चाहिए, ताकि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके। इन अदालतों को अब तक न्यायोचित ठहराने वाली वही सरकार सुनवाई में सुरक्षा उपायों की सुनिश्चितता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की सिफारिशों की अनदेखी कर रही है।"
लेख में कहा गया कि यदि सरकार फैसले को सही समझती है, तो उसे उसकी समग्रता से सहमत होना चाहिए न कि उसके अनुकूल अनुच्छेद को सामने रखना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि सीनेट ने बुधवार को पाकिस्तान सेना (संशोधन) विधेयक 2015 को पारित किया, जिसमें सुरक्षा उपायों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की किसी भी सिफारिश को शामिल नहीं किया गया है।
दोनों सदनों से पारित होने के बाद कानून बनने के लिए इस पर अब केवल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत है।
संपादकीय के मुताबिक, "यह जल्दबाजी समझ से परे है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय की सिफारिशें न तो कुछ मांग करती है और न ही सैन्य अदालतों की कार्यवाही में किसी तरह का व्यवधान पैदा करती हैं।"
लेख में कहा गया है, "सभी सिफारिशें उचित हैं और किसी तरह की दखलंदाजी न करने वाली है। पहली सिफारिश यह सुनिश्चित करता है कि सैन्य अदालतों में केवल आतंकवादियों की सुनवाई हो, न कि राजनीतिक कैदियों की। जबकि दूसरी सिफारिश बेहद आसान है, जिससे दुनिया की कोई सरकार असहमति नहीं जता सकती और तीसरा यह सुनिश्चित करता है कि सैन्य अदालतों को नियमों का पालन करना चाहिए।"