ढाका: अमेरिका में बाइडेन प्रशासन की बिदाई और ट्रंप के बागडोर संभालने के बाद बांग्लादेश में अचानक अब ये क्या शुरू हो गया है?...क्या बांग्लादेश में फिर शेख हसीना की वापसी हो सकती है?...क्या मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का पत्ता साफ हो जाएगा? एकाएक ऐसे सवाल बांग्लादेश में क्यों उठने शुरू हुए हैं?...आइये आपको पूरा मामला बताते हैं। दरअसल ऐसे हालात तब पैदा हुए जब अभी कुछ दिनों पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बांग्लादेश को दी जाने वाली समस्त सहायताओं पर रोक लगा दी। इसके बाद अस्थिरता की आशंका को भांप पर पूर्व पीएम शेख हसीना की पार्टी ने कई मुद्दों को लेकर मोहम्मद यूनुस को घेरना शुरू कर दिया।
अब हसीना की आवामी लीग पार्टी ने मोहम्मद युनुस के भी इस्तीफे की मांग कर दी है। इससे बांग्लादेश में हलचल पैदा होनी शुरू हो गई है। बता दें कि बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के इस्तीफे की मांग के साथ ही देश भर में सिलसिलेवार विरोध प्रदर्शनों की घोषणा भी कर दी है। इससे यूनुस सरकार के अंदर हड़कंप मच गया है।
हिंदुओं पर अत्याचार का आरोप
अवामी लीग ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर 'अत्याचार' करने का आरोप लगाया गया है। यह अवामी लीग का पहला बड़ा प्रदर्शन है, जिसके अधिकांश नेता पिछले साल पांच अगस्त को हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद से या तो गिरफ्तार हैं या भूमिगत हैं। अवामी लीग के फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए एक बयान के अनुसार, पार्टी अंतरिम सरकार के इस्तीफे की मांग करने तथा हड़ताल एवं नाकेबंदी के लिये एक फरवरी से सड़कों पर उतरेगी।
आवामी लीग चलाएगी बड़ा अभियान
बयान में कहा गया है कि पार्टी शनिवार से बुधवार तक अपनी मांगों के लिए पर्चे बांटेगी और अभियान चलाएगी। अवामी लीग के बयान के मुताबिक छह फरवरी को देश भर में विरोध मार्च और रैलियां आयोजित की जाएंगी, इसके बाद 10 फरवरी को प्रदर्शन और रैलियां होंगी। इसमें कहा गया है कि 16 फरवरी को देशव्यापी नाकेबंदी की घोषणा की गई है तथा 18 फरवरी को सुबह से शाम तक 'सख्त' हड़ताल होगी। इस बयान में अवामी लीग के सत्ता से बेदखल होने के बावजूद हसीना को 'प्रधानमंत्री' बताया गया। बयान में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में अपदस्थ प्रधानमंत्री और पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ हत्या के मामलों तथा अन्य आरोपों को वापस लेने की भी मांग की गयी है। (भाषा)