नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस कुरियन जोसफ नो शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर उनके निवास पर आयोजित होने वाले डिनर में शामिल होने से मना कर दिया है।
ये पत्र जस्टिस कुरियन ने एक अप्रैल को लिखा था जिसमें ुन्होंने कहा कि वे गुड फ्राइडे की वजह से डिनर में आने में असमर्थ है। डिनर में सुप्रीम कोर्ट के जज, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।
जस्टिस जोसफ ने पीएम को खत लिखकर कहा है कि किसी भी अहम कार्यक्रम का आयोजन धार्मिक महत्व की छुटि्टयों के दिन नहीं होना चाहिए। भारत में दीवाली, होली, ईद जैसे मौकों पर न सिर्फ छुट्टी होती है, बल्कि किसी भी महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम का आयोजन भी नहीं किया जाता है। गुड फ्राइडे का हमारे लिए बहुत बड़ा धार्मिक महत्त्व है। मुझे पता है कि अब चीफ जस्टिस कांफ्रेंस के कार्यक्रम को नहीं बदला जा सकता। आपसे आग्रह है कि भविष्य में सरकारी कार्यक्रम तय करते समय सभी धर्मों के लिए एक जैसे सम्मान की बात का ध्यान रखें।
इससे पहले छट्टी के दिन इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन को लेकर जस्टिस जोसफ पहले भी एतराज जता चुके हैं और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एचएल दत्तू को पत्र भेजकर गुड फ्राइडे के दिन मुख्य न्यायाधीशों की कॉन्फ्रेंस बुलाने पर विरोध जताया था। इस पत्र पर चीफ जस्टिस एचएल दत्तू ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि निजी हितों के बजाय संस्थागत हित्तों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।