पटना: बिहार पुलिस ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में कटौती या उसे हटाने के दावों का खंडन किया है। बिहार पुलिस ने एक्स पर पोस्ट करके लिखा, "पुलिस के अनुसार, उनकी सुरक्षा घटाई नहीं गई है, बल्कि नियमों और नियमित सुरक्षा समीक्षा के तहत उनकी सुरक्षा व्यवस्था का स्वरूप बदला गया है। बिहार पुलिस के नए सुरक्षा निर्देशों के तहत उन्हें बुलेट प्रूफ कार, पायलट और बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (BSAP) के गार्ड्स मुहैया कराए गए हैं।"
Related Stories
बिहार पुलिस ने क्या कहा?
बिहार पुलिस ने बताया, "विशेष सुरक्षा दल अधिनियम-2010 के प्रावधानानुसार सुरक्षार्थ अंगरक्षक/ आवास गार्ड/ स्कॉट गार्ड/ पायलट के अतिरिक्त BR Car भी उपलब्ध कराया गया है। इसी प्रकार श्रीमती राबड़ी देवी जी, माननीया नेता प्रतिपक्ष, बिहार विधान परिषद्-सह-माननीया पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार को विशेष सुरक्षा दल अधिनियम-2010 एवं बिहार सरकार का संकल्प ज्ञापांक-3663, दिनांक-02.05.2017 के प्रावधानानुसार सुरक्षार्थ अंगरक्षक/ आवास गार्ड/ स्कॉट गार्ड/ पायलट के अतिरिक्त BR Car भी उपलब्ध कराया गया है।"
बिहार पुलिस ने बताया, "साथ ही अनुमान्यता के आलोक में सादे लिवास में S.B. Component के रूप में भी सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराये गये हैं। दोनों माननीय को अनुमान्यता के अनुरूप सुरक्षा प्रदान की गयी है।"
हालही में तेज प्रताप ने अपनी सुरक्षा वापस की थी
हालही में लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया था। इसमें कहा गया था, "जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने अपनी सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं वापस कर दी हैं। बताया जा रहा है कि यह मामला पहले से ही बिहार सरकार के संज्ञान में था। बिहार से बाहर रहने के कारण उन्हें सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन बिहार लौटते ही उन्होंने स्वयं अपनी सारी सुरक्षा वापस कर दी। अब ऐसे में उनकी सुरक्षा और किसी भी अप्रिय घटना की जवाबदेही सरकार की होगी। लोकतंत्र में विपक्ष के नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है।"
इससे पहले तेज प्रताप ने कहा था, "मैं यही कहना चाहता हूं कि राज्य के नेताओं को, विशेषकर मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों को, हमेशा संयमित और मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति पर टिप्पणी करते समय उसकी उम्र, सम्मान और सामाजिक गरिमा का ध्यान रखना आवश्यक है। हमारी माता श्री हमारे लिए सम्मान का विषय हैं। इसलिए किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत टिप्पणी उचित नहीं मानी जा सकती। लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद हमेशा शालीन और सम्मानजनक होना चाहिए। मर्यादित भाषा और आपसी सम्मान ही राजनीति की सबसे बड़ी पहचान है।"