छत्तीसगढ़ के खेरागढ़ जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक बुजुर्ग महिला कटे हुए पेड़ की अगरबत्ती से पूजा कर रही हैं। वह रोते हुए पेड़ को विदा कर रही हैं। घटना सर्रागोदी गांव की देवला बाई पटेल की है ,जिनकी उम्र लगभग 90 वर्ष है। 2001 में उन्होंने पीपल का पेड़ लगाया था। वह हर रोज इसकी पूजा करती थीं और जल अर्पण करती थीं। वह पेड़ को रक्षा सूत्र से बांधती थीं और इस पेड़ को ऐसे तिलक करती थीं, जैसे कोई मां अपने बेटे को तिलक करती है।
इस मामले को लेकर जब गांव वालों से बातचीत की गई तो गांव वालों का कहना था कि हम सबने मना किया था, पर उन्होंने किसी की नहीं सुनी। रात के अंधेरे में ही पीपल के पेड़ को काट गए, सुबह तक कुछ न बचा।
गांव ने मनाया मातम
गांव के लोहों ने बताया कि पेड़ कटने के बाद सबकी आंखों में आंसू थे। जिस दिन पेड़ गिरा, पूरे गांव में ऐसा लगा जैसे कोई मर गया हो। धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची। ये सिर्फ पेड़ नहीं था, गांव का देव था। लोगों ने 20 वर्षों तक उसकी परिक्रमा की, मन्नतें मांगी, और अब वही आस्था जमीन दलाली के नीचे दब गई। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि इस पेड़ को काटने की जिम्मा किसके ऊपर था और किसके आदेश पर पेड़ को रातों रात काटा गया है।
गांव वालों ने दूसरा पेड़ लगवाया
पीपल का पुराना पेड़ कटने पर समाजसेवियों ने देवला बाई से फिर एक नया पीपल का पेड़ लगवाया। पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं देता, वह इतिहास, संस्कार और विश्वास की जड़ें सींचता है। देवला बाई का पीपल अब भले न रहा, पर उनकी आस्था आज भी जिंदा है, जो बताती है कि जहां इंसान लालच में अंधा हो जाता है, वहां प्रकृति अब भी मां बनी खड़ी है।
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