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'जिन्न' से छुटकारा दिलाने के नाम पर मौलवी ने किया था रेप, हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

 Published : May 07, 2026 07:53 am IST,  Updated : May 07, 2026 07:53 am IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग से ‘जिन्न’ निकालने के नाम पर रेप के आरोपी मौलवी की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने परिवार के विश्वास और लड़की की कमजोर स्थिति का फायदा उठाया।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी मौलवी को जमानत देने से इनकार किया। Image Source : ANI

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी एक मौलवी को जमानत देने से इनकार कर दिया है। यह मौलवी नाबालिग लड़की को 'जिन्न' से छुटकारा दिलाने के नाम पर उसके साथ बार-बार यौन शोषण करने का आरोपी है। अदालत ने कहा कि आरोप बहुत गंभीर हैं और आरोपी ने लड़की की कमजोर स्थिति और परिवार के विश्वास का फायदा उठाया। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मामले में आरोपी की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

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स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान थी लड़की

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित लड़की कई सालों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान थी। परिवार को लगा कि उस पर किसी बुरी आत्मा (जिन्न) का साया है। रिश्तेदार और स्थानीय लोगों के सुझाव पर परिवार इस मौलवी के पास पहुंचा। मौलवी खुद को रूहानी इलाज करने वाला बताता था। मौलवी नियमित रूप से लड़की के घर आने लगा। एक दिन उसने परिवार के सदस्यों को कमरे से बाहर जाने को कहा और बोला कि जिन्न निकालने की प्रक्रिया में गोपनीयता जरूरी है।

यौन शोषण के बाद मौलवी ने धमकी भी दी

मौलवी ने नाबालिग लड़की से कहा कि उसके शरीर में मौजूद जिन्न को केवल अश्लील हरकतों से ही निकाला जा सकता है। इसके बाद आरोपी ने लड़की का यौन शोषण किया। आरोपी ने लड़की को धमकी दी कि किसी को इस बारे में बताने पर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। बाद में लड़की ने अपनी मां को सारी बात बताई, जिसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और प्रेम नगर पुलिस स्टेशन में  FIR दर्ज हुई। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और POCSO एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस चल रहा है।

आरोपी के वकील ने जमानत याचिका में क्या कहा?

आरोपी मौलवी अक्टूबर 2019 से जेल में है। उसके वकील ने जमानत याचिका में कहा कि ट्रायल काफी आगे बढ़ चुका है। लड़की और उसके माता-पिता समेत प्रमुख गवाहों के बयान हो चुके हैं। बचाव पक्ष ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास और असंगतियां बताईं। राज्य सरकार की ओर से वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने परिवार की आस्था और लड़की की कमजोर स्थिति का नाजायज फायदा उठाया। लड़की का बयान FIR और सेक्शन 164 CrPC दोनों जगह एक जैसा है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए इस समय जमानत नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

जस्टिस शर्मा ने कहा कि उपलब्ध सबूतों से प्रथम दृष्टया यह साफ है कि आरोपी ने खुद को रूहानी इलाज करने वाला बताकर विश्वास का दुरुपयोग किया। लड़की ने अपने बयान में आरोपों का समर्थन किया है। गवाहों के बयानों में विरोधाभास जैसे मुद्दों की जांच अभी जमानत चरण में नहीं की जा सकती। ये सब ट्रायल के दौरान देखा जाएगा। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल अंतिम चरण में है। हालांकि आरोपी के जेल में बिताए लंबे समय को ध्यान में रखते हुए ट्रायल कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले को जल्द पूरा करने की कोशिश की जाए।

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