नई दिल्ली: दिल्ली में एक शादी समारोह के दौरान खुलेआम फायरिंग कर दहशत फैलाने वाले बदमाश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। फायरिंग की घटना 2-3 दिन पहले हुई थी। आरोपी का नाम पवन खत्री उर्फ 'चाची' (32) है, जो नरेला का रहने वाला है।
आरोपी 2024 में जेल से छूटकर आया था और इलाके में अपना फिर से दबदबा बनाने के लिए शादी समारोह में हवा में फायरिंग की थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस के अनुसार, पवन खत्री पर पहले से ही 5 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह 2024 में जेल से छूटकर आया था और इलाके में अपना दबदबा फिर से कायम करने की फिराक में था। इसी मकसद से उसने शादी समारोह में हवा में फायरिंग की थी।
वायरल वीडियो के आधार पर नरेला थाने में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे धर दबोचा। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने पवन खत्री के पास से एक देसी पिस्तौल और दो जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। फिलहाल, आरोपी से पूछताछ जारी है। पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि उसे हथियार किसने सप्लाई किए थे, ताकि हथियार सप्लाई करने वाले पूरे गिरोह का भंडाफोड़ किया जा सके।
एक अन्य खबर में, दिल्ली पुलिस ने मौर्या एन्क्लेव में एक व्यापारी की हत्या करने और उससे 7 लाख रुपये लूटने के मामले में पांच साल से फरार आरोपी को यूपी के ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया है। 35 साल के आशीष कुमार को 2015 में मौर्या एन्क्लेव पुलिस थाने में दर्ज डकैती-सह-हत्या के एक मामले में भगोड़ा अपराधी घोषित किया गया था। यह मामला भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें हत्या, डकैती और आपराधिक साजिश के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम के प्रावधान भी शामिल थे। कुमार के तीन सह-आरोपियों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी हैं।
आशीष कुमार फरार चल रहा था और रोहिणी की एक सत्र अदालत ने चार जनवरी, 2023 को उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। वह ग्रेटर नोएडा में एक मोबाइल फोन निर्माण संयंत्र में मजदूर के रूप में काम करता था। उसे 6 जून को गिरफ्तार किया गया था। आशीष कुमार को उसके दोस्त अमित ने आपराधिक साजिश में शामिल किया था, क्योंकि वह पहले से ही अवैध गतिविधियों में संलिप्त था। 2015 में कुमार ने अमित, आदिल, शाहबाद उर्फ कद्दू और शाहबाद के साथ मिलकर दिल्ली में एक व्यापारी को लूटने की योजना बनाई थी। उन्होंने कथित तौर पर पीड़ित से 7 लाख रुपये लूट लिए और विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी। उसने बताया कि कुमार को कथित तौर पर उसके हिस्से के 1.5 लाख रुपये मिले थे। वर्ष 2020 में उसे 45 दिनों के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी और कोविड-19 महामारी के कारण इसे बढ़ा दिया गया था, लेकिन अवधि खत्म होने के बाद उसने आत्मसमपर्ण नहीं किया, जिसके कारण उसे घोषित भगोड़ा करार दिया गया था। (भाषा इनपुट के साथ)
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