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ट्रंप के शपथ लेने से पहले अमेरिकी यूनिवर्सिटीज ने सभी इंडियन छात्रों बुलाए वापस, जानें क्या सता रहा डर

 Published : Nov 29, 2024 12:06 pm IST,  Updated : Nov 29, 2024 12:06 pm IST

हाल ही में अमेरिका की कई यूनिवर्सिटीज ने इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को वापस कैंपस लौटने का कहा है। इसके बाद से ही दुनिया भर के छात्रों में कौतुहल का माहौल बना हुआ है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : FREEPIK

कमला हैरिस को चुनाव में हराने के बाद डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी 2025 को शपथ लेने वाले हैं। इससे पहले अमेरिका की नामी यूनिवर्सटीज ने इंडियन स्टूडेंट समेत सभी इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को कैंपस में वापस बुला लिया है। यूनिवर्सिटी में इस समय काफी टेंशन भरा माहौल देखे को मिल रहा है क्योंकि ट्रंप के पहले कार्यकाल में ट्रैवल, वीजा एप्लीकेशन और पॉलिसी में लोगों को काफी दिक्कत का सामना कर पड़ा था। ऐसे में यूनिवर्सिटीज किसी भी असुविधा से बचने के लिए पहले ही छात्रों को कैम्पस में वापस बुला रही है।

कई यूनिवर्सिटीज ने जारी किए एडवाइजरी

यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट (यूमास एमहर्स्ट) ने कम से कम दो अन्य संस्थानों के साथ मिलकर सलाह जारी की है, जिसमें इंटरनेशनल स्टूडेंट्स, स्कॉलर और स्टॉफ से ट्रंप के शपथ ग्रहण से पहले अमेरिका लौटने का आग्रह किया गया है। वैश्विक मामलों के कार्यालय की ओर से जारी ट्रैवल एडवाइजरी में कहा गया है,  "यह एडवाइजरी अत्यधिक सावधानी के साथ जारी की गई है, कि नए राष्ट्रपति प्रशासन अपने कार्यकाल के पहले दिन ही कई नई नीतियां लागू कर सकता है।"

जबकि यूमास एमहर्स्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यह सलाह अनिवार्य नहीं है। ट्रम्प ने पहले कार्यकाल के दौरान साल 2017 में ट्रैवल बैन लागू किया था, ऐसे में एक नया प्रशासन अचानक और व्यापक नीतिगत बदलावों को लागू कर सकता है।

वेस्लीयन यूनिवर्सिटी और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) सहित अन्य यूनिवर्सिटीज ने भी इसी तरह के गाइडलाइन जारी किए हैं। वेस्लीयन के इंटरनेशनल स्टूडेंट्स मामलों के ऑफिस ने छात्रों को संभावित कठिनाइयों से बचने के लिए इस समय अमेरिका में रहने की सलाह दी, जबकि MIT ने कार्यकारी आदेशों की संभावना पर प्रकाश डाला, जो विदेश में वीजा जारी करने और दूतावास संचालन को प्रभावित कर सकते हैं।

क्यों हो रही यूनिवर्सिटी में चिंता?

ट्रम्प के पहले कार्यकाल में इमीग्रेशन पॉलिसी ने इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के जीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया। जनवरी 2017 में, अपने राष्ट्रपति पद के सिर्फ़ सात दिन बाद, ट्रम्प ने सात मुस्लिम देशों से आने वाले यात्रियों पर बैन लगाने वाले एक एग्जिक्यूटिव आदेश पर साइन किए। इस बैन ने एयरपोर्ट्स पर अराजकता पैदा कर दी और छात्रों और टीचरों को विदेश में फँसा दिया था। इस बैन को बाद में वेनेजुएला और उत्तर कोरिया जैसे देशों तक बढ़ाया गया था।

यूमास डार्टमाउथ में, स्थायी निवासी का दर्जा प्राप्त दो फैकल्टी मेंबर को रिहा होने से पहले बोस्टन के लोगान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर घंटों तक हिरासत में रखा गया था। इसके बाद यूनिवर्सिटी को, अन्य लोगों के साथ मिलकर, उनकी मदद के लिए आगे आना पड़ा था।

ऐसी ही पॉलिसीज के फिर से लागू होने का डर बना हुआ है। अपने राष्ट्रपति काल के दौरान, ट्रम्प ने स्टूडेंट वीजा की अवधि को 4 साल से घटाकर 2 साल करने का भी प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में बाइडेन प्रशासन ने पलट दिया था। अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए, ऐसे फैसले लेकर अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया था। ऐसे में उनके दोबारा आने पर यूनिवर्सिटीज को फिर से वही चिंता सताने लगी है और इन सभी दिक्कतों से स्टूडेंट्स को बचाने के लिए उन्हें वापस आने को कहा है।

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