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Global Student Prize 2025: भारत का एकमात्र फाइनलिस्ट, 14 की उम्र में छोड़ दिया था घर, जानिए बिहार के चंपारण के लाल की कहानी

Edited By: Shakti Singh Published : Sep 12, 2025 05:04 pm IST, Updated : Sep 12, 2025 05:54 pm IST

आदर्श बहुत उम्मीदों के साथ कोटा गए थे, लेकिन वहां पहुंचकर उन्हें हकीकत पता चली। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अब वह दूसरे बच्चों का जीवन आसान करने के लिए काम कर रहे हैं।

Adarsh Kumar- India TV Hindi
Image Source : GLOBALTEACHERPRIZE आदर्श कुमार

बिहार के चंपारण में पैदा हुए आदर्श पर आज पूरा देश गर्व कर रहा है। वह ग्लोबल स्टुडेंट प्राइज 2025 के फाइनल में जगह बनाने वाले एकमात्र भारतीय छात्र हैं। इस अवार्ड को बच्चों के नोबल पुरस्कार के नाम से भी जाना जाता है। आदर्श ने बेहद कम उम्र में सफलता हासिल कर ली है, लेकिन उनका संघर्ष भी इतनी ही कम उम्र में शुरू हो गया था। आदर्श ने अपने सपनों को पंख लगाने के लिए 14 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था। हालांकि, घर से बाहर निकलकर उन्हें सिर्फ ठोकरें मिलीं। इन्हीं को अपना हथियार बनाते हुए आदर्श ने सफलता की सीढ़ियां चढ़ना शुरू किया और अब इतिहास रचने की कगार पर हैं।

18 साल के आदर्श कुमार का बचपन गरीबी, बिजली की कमी और आर्थिक तंगी के बीच बीता। उस समय बुनियादी सुविधाएं भी मुश्किल से उपलब्ध होती थीं। चंपारण, जो महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन के लिए प्रसिद्ध है, आदर्श के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ संघर्ष की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सामाजिक बदलाव की है, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।

बिजली की कमी से तंग आकर गांव छोड़ा

आदर्श का परिवार गरीब किसान पृष्ठभूमि का था। गांव में बिजली की कटौती के कारण पढ़ाई करना मुश्किल था। स्कूल जाना और अच्छी शिक्षा प्राप्त करना उनके लिए सपने में भी मुश्किल था, लेकिन आदर्श ने हार नहीं मानी। उन्होंने स्थानीय स्कूलों में पढ़ाई की और अपनी मेहनत से जयपुर के प्रतिष्ठित जयश्री पेरिवाल इंटरनेशनल स्कूल में एडमिशन हासिल किया। यहां उन्होंने 30 लाख रुपये की स्कॉलरशिप हासिल की। वह ऐसा करने वाले पहले छात्र बने। यह उपलब्धि उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इसके जरिए उन्होंने न सिर्फ अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि दूसरों के लिए भी रास्ता बनाया।

गरीब बच्चों के लिए काम किया

स्कॉलरशिप जीतने के बाद आदर्श ने गरीब और ग्रामीण छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने कई पहल शुरू कीं स्किल्जो इनमें से एक है। यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को स्किल डेवलपमेंट, मेंटरशिप और स्कॉलरशिप के अवसर प्रदान करता है। आदर्श ने अपना स्कॉलरशिप का अनुभव साझा करते हुए सैकड़ों छात्रों को JPIS जैसी संस्थाओं में प्रवेश दिलाने में मदद की।

ग्रामीण बच्चों के लिए वरदान

स्किल्जो एक लर्निंग एप है, जो ग्रामीण भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के मुद्दों पर काम करता है। आदर्श ने इसमें AI-आधारित टूल्स का उपयोग करके छात्रों को मेंटरिंग प्रदान की, जिससे हजारों युवाओं को फायदा पहुंचा। उनका फोकस उन क्षेत्रों पर है, जहां शिक्षा की कमी युवाओं को पीछे धकेल रही है। आदर्श की इन पहलों ने वंचित वर्ग में बड़ा बदलाव लाया। वे मानते हैं कि शिक्षा ही असली "बदलाव" का हथियार है, और उन्होंने अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक स्तर पर काम किया।

ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज के फाइनल में बनाई जगह

आदर्श की मेहनत को 2025 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना गया। ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज 2025 के फाइनल में वह जगह बनाने में सफल रहे हैं। यह दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित छात्र पुरस्कार है। इसे जीतने वाले को 100,000 अमेरिकी डॉलर इनाम में मिलते हैं। आदर्श 148 देशों से लगभग 11,000 छात्रों में से वे टॉप 50 में चुने गए फिर सितंबर 2025 में टॉप 10 फाइनलिस्ट्स में वह इकलौते भारतीय हैं। यह पुरस्कार उन छात्रों को दिया जाता है, जो शिक्षा के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों (जैसे गरीबी, असमानता, पर्यावरण) का समाधान करते हैं।

100,000 अमेरिकी डॉलर जीते तो क्या करेंगे?

आदर्श का कहना है कि यदि वे जीतते हैं, तो वे स्किल्जोएक्स  नामक AI-पावर्ड मेंटरशिप टूल लॉन्च करेंगे, जो ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचेगा। इसके साथ ही इग्नाइट फेलोशिप शुरू करेंगे, जो वैश्विक छात्र इनोवेटर्स को सपोर्ट करेगी। आदर्श कहते हैं, "चंपारण की मिट्टी ने मुझे सिखाया कि सपने बड़े हो सकते हैं, भले ही शुरुआत छोटी हो।" उनकी कहानी ग्रामीण भारत के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो दिखाती है कि शिक्षा और उद्यमिता से दुनिया बदली जा सकती है। विजेता की घोषणा अगले महीने होगी।

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