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बारिश के मौसम में ट्रिगर हो सकती है अस्थमा की समस्या, स्वामी रामदेव ने बताए लंग्स की कपैसिटी को सुधारने के तरीके

 Written By: Sajid Khan Alvi, Edited By: Vanshika Saxena
 Published : Sep 05, 2025 11:54 am IST,  Updated : Sep 05, 2025 11:54 am IST

बरसाती मौसम में लंग्ज से जुड़ी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। आइए स्वामी रामदेव से कुछ ऐसे नेचुरल तरीकों के बारे में जानते हैं जो आपके फेफड़ों की क्षमता को सुधारने में मददगार साबित हो सकते हैं।

अस्थमा के लिए उपाय- India TV Hindi
अस्थमा के लिए उपाय Image Source : FREEPIK

आसमान से बरसता पानी लोगों के लिए आफत बन गया है। पूरे भारत में बाढ़-बारिश से तबाही मची हुई है। लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, खाने-पीने की कमी हो रही है, लोग गंदा पानी पीने और दूषित खाना खाने को मजबूर हैं। नतीजा लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ गया है। वायरल फीवर, आई इंफेक्शन, कमजोर इम्यूनिटी, हेपेटाइटिस, डायरिया जैसी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं।

बरसात की वजह से मौसम में छाई नमी से सांस के मरीजों की आफत भी बढ़ जाती है, खासकर जो लोग अस्थमा से परेशान हैं, वो चाहकर भी बारिश का मजा नहीं ले सकते। मॉनसून में अस्थमा ट्रिगर हो सकता है और फिर सांस की नली में सूजन-सीने में जकड़न जैसी दिक्कत भी बढ़ जाती है और लंग्स को प्रॉपर ऑक्सीजन नहीं मिलती, नतीजा सांस फूलने लगती है। इसलिए जिसे फेफड़ों से जुड़ी कोई भी बीमारी है, उसे मॉनसून में अपना ख्याल रखना चाहिए। थोड़ी सी भी लापरवाही से अस्पताल जाने की नौबत आ सकती है। स्टडी कहती है कि सीओपीडी से मौत के मामले पिछले 8 साल में 9 गुना बढ़ गए हैं। आइए योगगुरु की शरण में चलते हैं और अस्थमा, सीओपीडी, फाइब्रोसिस के साथ लंग्स की तमाम बीमारियों को दूर करने के उपाय जानते हैं।

बरसाती मौसम में फेफड़ों पर खतरा

बारिश के मौसम में नाक बंद, चेस्ट कंजेशन, बार-बार छींक आना, आंखें लाल होना, बदन पर रैशेज, वायरल बुखार, इनडाइजेशन जैसे लक्षणों के दिखाई देने पर सावधान हो जाना चाहिए। मॉनसून में बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और पोलन से बचना बेहद जरूरी है। बरसाती मौसम में रेस्पिरेटरी डिसऑर्डर, लंग्स में इंफेक्शन, सांस नली में सिकुड़न, चेस्ट में भारीपन और सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है।

अस्थमा के लिए घरेलू उपाय

अस्थमा की परेशानी को ट्रिगर होने से रोकने के लिए जुकाम से बचना चाहिए। इसके लिए आपको गर्म चीजें खानी-पीनी चाहिए, गुनगुना पानी ही पीना चाहिए, नमक डालकर गरारे करने चाहिए और नाक में अणु तेल डालना चाहिए। अस्थमा की परेशानी को दूर करने के लिए आप अदरक, लौंग और दालचीनी का काढ़ा भी पी सकते हैं। इसके अलावा तुलसी, अदरक और काली मिर्च वाली चाय भी अस्थमा में कारगर साबित हो सकती है। गिलोय का काढ़ा पीने से, तुलसी के पत्ते चबाने से और अनुलोम-विलोम करने से भी अस्थमा में आराम मिल सकता है।

फेफड़ों को फौलादी बनाने के लिए क्या करें?

अगर आप अपने फेफड़ों की क्षमता को सुधारना चाहते हैं, तो हर रोज प्राणायाम करें, दूध में हल्दी लें, त्रिकुटा पाउडर लें और रात को स्टीम लेकर सोएं। सोते वक्त तलवों पर गर्म सरसों का तेल लगाना, नाभि में सरसों का तेल डालना, नाक में सरसों का तेल डालना भी लंग्ज के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके अलावा आप 100 ग्राम बादाम, 20 ग्राम काली मिर्च, 50 ग्राम शक्कर को मिक्स कर दूध के साथ एक चम्मच लें और खुद-ब-खुद पॉजिटिव असर देखें।

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