डायबिटीज के मरीजों में बार-बार पेशाब आना जिसे मेडिकल भाषा में पॉलीयुरिया कहा जाता है एक बेहद आम लक्षण है। अक्सर लोग इसे केवल एक परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे शरीर का एक खास वैज्ञानिक तंत्र काम कर रहा होता है। आइए आसान भाषा में आपको समझाते हैं कि डायबिटीज के मरीजों को बार बार पेशाब क्यों आता है।
बार बार क्यों आता है पेशाब
जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज होती है, तो उसका शरीर इंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं कर पाता या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। इंसुलिन की कमी के कारण खून में मौजूद ग्लूकोज सेल्स तक नहीं पहुंच पाता और ब्लड शुगर का लेवल बहुत बढ़ जाता है।
किडनी पर अतिरिक्त दबाव: सामान्य स्थिति में हमारी किडनियां खून को फिल्टर करती हैं और ग्लूकोज को वापस सोखकर शरीर में भेज देती हैं। लेकिन जब ब्लड शुगर का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तो किडनियां सारा ग्लूकोज वापस नहीं सोख पातीं।
ऑस्मोसिस: एक्सट्रा ग्लूकोज यूरिन के रास्ते बाहर निकलने लगता है। ग्लूकोज अपने साथ शरीर के पानी को भी खींचता है। इस वजह से ब्लैडर तेजी से भरता है और मरीज को बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है।
पेशाब के रास्ते शरीर से भारी मात्रा में पानी बाहर निकलने के कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है। जब शरीर में पानी कम होता है, तो दिमाग को प्यास लगने का संकेत मिलता है। ऐसे में मरीज खुद को हाइड्रेट रखने के लिए बार-बार पानी पीता है। अधिक पानी पीने से फिर से बार-बार पेशाब आता है। यह एक ऐसा चक्र बन जाता है जो मरीज को दिन ही नहीं, बल्कि रात में भी परेशान करता है जिसे नोक्टुरिया कहते हैं।
अन्य वजहें
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन: डायबिटीज के मरीजों के यूरिन में ग्लूकोज की मात्रा अधिक होने के कारण वहां बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। यूटीआई होने पर भी बार-बार और जलन के साथ पेशाब आने की समस्या होती है।
दवाइयों का असर: डायबिटीज की कुछ दवाएं जैसे SGLT2 इनहिबिटर्स जानबूझकर किडनी के जरिए एक्सट्रा ग्लूकोज को पेशाब के रास्ते बाहर निकालती हैं, जिससे पेशाब की फ्रीक्वेंसी बढ़ जाती है।
इस समस्या से कैसे निपटें?
ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें: डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें, संतुलित आहार खाएं और नियमित व्यायाम करें। शुगर लेवल सामान्य होते ही यह समस्या काफी हद तक ठीक हो जाती है।
पानी पीना बंद न करें: बार-बार पेशाब आने के डर से पानी पीना कम न करें, नहीं तो डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
कैफीन और अल्कोहल से बचें: चाय, कॉफी और शराब यूरिन की मात्रा को और बढ़ाते हैं, इसलिए इनका सेवन कम करें।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता ह