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राकेश टिकैत ने सरकार की मंशा पर उठाया सवाल, कहा-जहां चाहे वहां बातचीत को तैयार हैं किसान नेता

 Reported By: IANS
 Published : Dec 21, 2020 11:08 pm IST,  Updated : Dec 21, 2020 11:08 pm IST

उत्तर प्रदेश के किसान नेता राकेश टिकैत ने किसान आंदोलन समाप्त करने को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सरकार आंदोलन को लंबा खींचना चाहती है, इसलिए किसान नेताओं से बातचीत करना नहीं चाहती है।

Always ready for talks but Centre must offer concrete solution, says Rakesh Tikait- India TV Hindi
राकेश टिकैत ने किसान आंदोलन समाप्त करने को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। Image Source : ANI

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के किसान नेता राकेश टिकैत ने किसान आंदोलन समाप्त करने को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सरकार आंदोलन को लंबा खींचना चाहती है, इसलिए किसान नेताओं से बातचीत करना नहीं चाहती है। वह कहते हैं कि सरकार जहां भी चाहे वहां किसान नेता बातचीत के लिए आ जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता राकेश टिकैत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के साथ गाजीपुर बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं और उनका कहना है कि सरकार जब तक नये कृषि कानून को वापस नहीं लेगी, किसान तब तक वापस नहीं होंगे।

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उन्होंने कहा, "ये (सरकार) कह रहे हैं कि हम कानून वापस नहीं लेंगे और हमने कह दिया है हम घर वापस नहीं जाएंगे।" राकेश टिकैत कहते हैं कि, "देश का किसान कमजोर नहीं है और वह अपने हक की लड़ाई में पीछे नहीं हटने वाला है। सरकार ने किसान संगठनों के नेताओं को उनकी सभी मांगों के संबंध में बिंदुवार प्रस्ताव भेजा है और उन्हें अगले दौर की बातचीत के लिए बुलाने के लिए उनसे तारीख बताने को कहा है।"

इस संबंध में पूछे गए सवाल पर भाकियू नेता टिकैत ने कहा, सरकार के पास सारे तंत्र हैं वह जब जाहे बात कर सकती है, लेकिन सरकार बात नहीं करना चाहती है। उन्होंने इस संबंध में सरकार पर झूठ फैलाने का आरोप आरोप लगाया। टिकैत से जब पूछा गया कि क्या फिक्की सभागार में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से किसान बातचीत करने को तैयार हैं। इस पर उन्होंने कहा, हमने कहा है कि हमें जहां भी कहेंगे हम वहां आ जाएंगे, लेकिन सरकार तो बात करना ही नहीं चाहती है।

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत 26 नवंबर से शुरू हुए किसानों के इस आंदोलन में लाइम लाइट में रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि वह देश में किसानों की सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश से आते हैं और किसानों के हक की लड़ाई लड़ने वाले नेता की पहचान उनको विरासत में मिली है। राकेश टिकैत के पिता और उत्तर प्रदेश में भाकियू के संस्थापक महेंद्र सिंह टिकैत की अगुवाई में 1988 में दिल्ली में हुई बोर्ट क्लब रैली, किसानों के आंदोलन के इतिहास में दर्ज है, जब केंद्र सरकार को किसानों की मागें माननी पड़ी थी।

राकेश टिकैत के बड़े भाई और इस समय भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत भी बीते दिनों किसानों के आंदोलन में हिस्सा लेने गाजीपुर बॉर्डर आए थे, लेकिन संगठन की ओर से यहां आंदोलन की कमान राकेश टिकैत ही संभाले हुए हैं। राकेश टिकैत को एक दिसंबर को विज्ञान-भवन में किसान संगठनों के साथ हुई मंत्रि-स्तरीय वार्ता में आमंत्रित नहीं किया गया, लेकिन बाद में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कृषि भवन में उसी शाम उनको आमंत्रित किया था। हालांकि बाद की वार्ताओं में वह शामिल रहे हैं।

राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार जब फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है तो उस पर फसलों की खरीद भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि सरकार तीनों नये कानूनों का वापस ले और किसानों को एमएसपी की गारंटी के लिए नया कानून बनाए।

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