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भारत को चीन के खिलाफ एक दीवार बनने की जरूरत: सीडीएस बिपिन रावत

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Dec 11, 2020 04:22 pm IST,  Updated : Dec 11, 2020 04:22 pm IST

चीन विश्व शांति के लिए बड़े खतरे के तौर पर उभर रहा है। उसकी नापाक मंशा को भांप ताकतवर देश गोलबंद हो गए हैं। इसी का नतीजा है कि हिंद महासागर क्षेत्र में अभी 120 से ज्यादा युद्धपोत तैनात हैं। 

India’s approach to security must shift to a multilateral one: CDS Rawat- India TV Hindi
चीन विश्व शांति के लिए बड़े खतरे के तौर पर उभर रहा है। उसकी नापाक मंशा को भांप ताकतवर देश गोलबंद हो गए हैं। Image Source : PTI

नई दिल्ली: चीन विश्व शांति के लिए बड़े खतरे के तौर पर उभर रहा है। उसकी नापाक मंशा को भांप ताकतवर देश गोलबंद हो गए हैं। इसी का नतीजा है कि हिंद महासागर क्षेत्र में अभी 120 से ज्यादा युद्धपोत तैनात हैं। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने इसकी जानकारी दी। जनरल रावत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित वैश्विक सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। यह कार्यक्रम ग्लोबल डायलॉग फोरम की ओर से ग्लोबल डायलॉग रिव्यू और कोनराड एडेनॉयर स्टिफ्टंग के साथ साझेदारी में आयोजित किया गया। अपने भाषण में जनरल रावत ने कहा कि आज भारत बढ़ी हुई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है और शांति और स्थिरता के लिए सबसे अच्छा गारंटर है।

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हालांकि रावत ने पिछले सात महीनों से लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ चीन के साथ चल रहे गतिरोध का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने भारत-प्रशांत क्षेत्र के कई संदर्भों में एशियाई पड़ोसी का इशारों-इशारों में जिक्र जरूर किया। जनरल रावत ने कहा कि भारत जैसे देशों के लिए भूमि और सीमाओं की सुरक्षा एक प्राथमिक चिंता है। उन्होंने कहा, इसलिए, खतरों और चुनौतियों की प्रकृति के सही आकलन के आधार पर हमारे सशस्त्र बलों द्वारा किए जाने वाले आधुनिकीकरण कार्यक्रमों को सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत संरचनाओं को विकसित करने की आवश्यकता है। 

उन्होंने कहा, इसके अलावा, हम हमारे क्षेत्र में स्थिरता और शांति सुनिश्चित करने के लिए समान विचारधारा वाले राष्ट्रों के साथ भी साझेदारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, सुरक्षा के लिए हमारे दृष्टिकोण को एकपक्षीय मोड से बहुपक्षीय मोड में स्थानांतरित करने की आवश्यकता है, जो बढ़ते प्रशिक्षण, साझेदार देशों के साथ जुड़ाव को बढ़ाता है, ताकि भविष्य में संयुक्त प्रतिक्रिया को उपजाऊ बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका, इंडो-पैसिफिक को उसके भविष्य के लिए परिणामी मानता है, इसी तरह जापान, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ब्रिटेन, इंडोनेशिया और जर्मनी भी उनके लिए इसे सामरिक महत्व का क्षेत्र पाते हैं।

रावत ने कहा कि हालांकि एक सैन्य और आर्थिक शक्ति के रूप में चीन के उदय ने क्षेत्र को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है। एक बढ़ती क्षेत्रीय शक्ति के रूप में भारत के सामने आने वाली चुनौतियों के आधार पर, उन्होंने कहा, हमें अपने रक्षा बलों की क्षमता निर्माण और विकास के लिए संरचित लंबे समय की योजना बनाने की आवश्यकता है। मजबूत भारत के निर्माण की तलाश में, हमें एक शांतिपूर्ण और स्थिर सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता है।

सीडीएस रावत ने कहा, हमें अतिरिक्त क्षेत्रीय शक्तियों, क्षेत्रीय संपर्कों के साथ रणनीतिक स्वायत्तता और सहकारी संबंधों को बनाए रखने की आवश्यकता है। हमें जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत (जेएआई), भारत-आसियान और इसी तरह के मौजूदा तंत्रों का सही संतुलन रखने के लिए द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय और बहुपक्षीय तंत्र बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी किसी भी राष्ट्र के वर्चस्व की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, चाहे वह सैन्य क्षेत्र में हो या किसी अन्य क्षेत्र में हो। इसलिए, अनुसंधान और विकास में निवेश किसी भी उद्यम के लिए भविष्य की कार्रवाई का निर्धारण करेगा।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रौद्योगिकी एक निवारण का साधन बननी चाहिए, न कि विनाश का स्रोत। उन्होंने कहा, प्रौद्योगिकी का मानव जाति को लाभ होना चाहिए और इसका उपयोग मौजूदा प्रणालियों को नष्ट करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। जनरल रावत ने एक सकारात्मक टिप्पणी पर अपना संबोधन समाप्त करते हुए कहा कि यह भारत की सदी है। उन्होंने कहा, भारत को लेकर दुनिया भर में बहुत से लोग आशावान हैं। इसमें प्रतिभा, जनसांख्यिकीय लाभांश और संस्कृति की जीवंतता शामिल है।

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