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नक्सल कमांडर पंडा ने बताई बुरकापाल हमले की पूरी कहानी

 Written By: Bhasha
 Published : May 17, 2017 11:48 pm IST,  Updated : May 17, 2017 11:48 pm IST

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में बुरकापाल हमले में शामिल नक्सली ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

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रायपुर (भाषा): छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में बुरकापाल हमले में शामिल नक्सली ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। सुकमा जिले के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पिछले महीने जिले के बुरकापाल हमले में शामिल जनमिलिशिया डिप्टी कमांडर और नक्सली सहयोगी पोडि़याम पाण्डू उर्फ पंडा (45) ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। पंडा ने इस महीने की नौ तारीख को आत्मसमर्पण किया था जिसे आज मीडिया के सामने लाया गया। 

पुलिस अधिकारियों ने कहा, पंडा ने पुलिस को बताया है कि उसने दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ताओं की मुलाकात नक्सली नेताओं से करवाने में मदद की थी। पंडा चिंतागुफा गांव का पूर्व सरपंच है, वर्तमान में उसकी पत्नी गांव की सरपंच है। उन्होंने कहा, पंडा ने पुलिस को जानकारी दी है कि नक्सली बुरकापाल में हमले की तैयारी पहले से ही कर रहे थे। वह 15 अप्रैल से ही चिंतागुफा और बुरकापाल क्षेत्र में सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। जिसके बाद ही 24 अप्रैल को घटना को अंजाम दिया गया। इस घटना में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए थे। 

पंडा ने पुलिस को बताया कि घटना के दिन 24 अप्रैल को सीआरपीएफ का दल जब अपने शिविर से निकला तब इसकी जानकारी नक्सली सदस्यों ने अपने कमांडरों तक पहुंचाई। इस दौरान हथियारबंद नक्सली बुरकापाल से लगभग आठ किलोमीटर दूर कासलपाड़ा गांव के करीब मौजूद थे। 

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों के बारे में जानकारी मिलने के बाद नक्सलियों ने एक घंटे के दौरान ही क्षेत्र में घेराबंदी की और लगभग 11.30 बजे पुलिस दल पर हमला शुरू कर दिया। हमले के समय पंडा इंसास रायफल से गोलीबारी कर रहा था। 

उन्होंने बताया कि घटना के बाद पंडा और उसके साथियों ने जवाबी कार्रवाई के दौरान घायल नक्सलियों और मारे गए नक्सली कमांडर अनिल के शव को कासलपाड़ा गांव पहुंचाया। इसके बाद पंडा अपना हथियार माओवादी कमंाडर अुर्जन को सौंप दिया और अपने गांव लौट गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस महीने की सात तारीख को पंडा चिंतागुफा थाने की पुलिस के संपर्क में आया और उसने समाज की मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई। बाद में उसे सुकमा लाया गया और उसने नौ मई को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। 

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