नई दिल्ली: तेलंगाना सरकार ने कहा है कि ‘केवल’ अविवाहित महिलाएं राज्य के समाज कल्याण आवासीय डिग्री कॉलेजों में शिक्षा पाने के लायक हैं। सरकार का तर्क है कि शादीशुदा महिलाओं के कारण अन्य का पढ़ाई से ध्यान हटता है। इन कोर्स में बीए, बी कॉम, बीएससी शामिल है।
सरकार का मानना है कि शादीशुदा महिला कॉलेजों में भटकाव पैदा करती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अजीबोगरीब नियम पिछले एक साल से लागू है। 23 आवासीय कॉलेजों के करीब 4 हजार सीटों पर एडमिशन इस नियम से होता है। इन कॉलेजों में महिला कैंडिडेट को सभी चीजें मुफ्त दी जाती हैं।
तेलंगाना सोशल वेलफेयर रेजिडेंशियल एजुकेशनल इंस्टिट्यूट्स सोसाइटी के कंटेंट मैनेजर वेंकट राजू ने बताया कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आवासीय डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाली गैरशादीशुदा छात्राओं का ध्यान न भटके क्योंकि यह हर तरह से मुमकिन है कि शादीशुदा महिलाओं के पति हफ्ते में एक या दो बार उनसे मिलने आएंगे।
वहीं सोसाइटी के सेक्रेटरी डॉ.आरएस प्रवीन कुमार ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र में महिलाओं के लिए आवासीय डिग्री कॉलेज बनाने का मकसद यही था कि बाल विवाह की प्रथा को तोड़ा जा सके। लेकिन हम उन्हें एडमिशन लेने से नहीं रोक सकते।
सरकार के इस नोटिफिकेशन का सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यह न सिर्फ दुखद कदम है, बल्कि यह शादी जैसे पवित्र बंधन का भी अपमान है।