1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. सिंधु जल समझौते पर PM मोदी का बड़ा बयान, ‘खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते’

सिंधु जल समझौते पर PM मोदी का बड़ा बयान, ‘खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते’

 Written By: Bhasha
 Published : Sep 26, 2016 03:48 pm IST,  Updated : Sep 26, 2016 05:15 pm IST

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते की समीक्षा के लिए बुलायी बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राष्ट्रीय

pm modi- India TV Hindi
pm modi

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते की समीक्षा के लिए बुलायी बैठक की अध्यक्षता की। सिंधु जल संधि समझौते पर पीएम मोदी ने सख्त संदेश दिया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि बैठक में पीएम ने कहा कि Blood and water can't flow same time... यानी खून और पानी साथ साथ नहीं बह सकते। साथ ही संकेत दिए हैं कि सिंधु का पानी रोका जा सकता है।

(देश-विदेश की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें)

इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, विदेश सचिव एस जयशंकर, जल संसाधन सचिव एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। यह समीक्षा बैठक 18 भारतीय सैनिकों की जान लेने वाले उरी आतंकी हमले का पाकिस्तान को मुनासिब जवाब देने के विकल्पों पर विचार के सिलसिले में बुलाई गई थी। भारत में यह मांग लगातार बढ़ रही है कि आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए भारत सिंधु नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े इस समझौते को तोड़ दे।

सिंधु जल समझौते पर सितंबर 1960 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किये थे। इस समझौते के तहत छह नदियों, व्यास, रावी, सतलज, सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी को दोनों देशों के बीच बांटा गया था।

Also read:

पाकिस्तान की यह शिकायत रही है कि उसे पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा और इसके लिए वह एक दो बार अन्तरराष्ट्रीय मध्यस्थता के लिए भी जा चुका है। जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने पिछले सप्ताह कहा था कि 1960 में किये गये इस समझौते के बारे में सरकार का जो भी फैसला होगा उनका राज्य इसका पूरा समर्थन करेगा।

सिंह ने कहा था, इस संधि के कारण जम्मू कश्मीर को बहुत नुकसान हुआ है। क्योंकि राज्य इन नदियों, विशेष रूप से जम्मू की चिनाब के पानी का कृषि अथवा अन्य जरूरतों के लिए पूरा उपयोग नहीं कर पाता है। उन्होंने कहा था, केन्द्र सरकार सिंधु जल संधि के बारे में जो भी फैसला करेगी, राज्य सरकार उसका पूरा समर्थन करेगी।

उल्लेखनीय है कि भारत ने पिछले सप्ताह स्पष्ट तौर पर कहा था, इस संधि को जारी रखने के लिए आपसी विश्वास और सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत