नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि बांग्लादेशी प्रवासियों की घुसपैठ से देश की अखंडता और संप्रभुता प्रभावित हुई है।
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प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 'सत्यमेव जयते' नामक एनजीओ की याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में दावा किया गया था कि बांग्लादेश के दो करोड़ अवैध प्रवासी भारत में शरण लिए हुए हैं।
पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता के वकील की बात सुन ली। यह त्वरित याचिका जनहित के काम के रूप में दायर की गई है। हमें इस त्वरित याचिका को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मंजूर करने का कोई आधार नहीं दिख रहा है। इसलिए रिट याचिका को खारिज किया जाता है।
शीर्ष न्यायालय बांग्लादेश और अन्य विदेशी क्षेत्रों से भारत में आने वाले अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली एनजीओ की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
याचिका में कहा गया, भारत के निर्वाचन आयोग को निर्देश दीजिए कि वह जन प्रतिनिधि कानून, 1950 की धारा 16 के तहत अयोग्य माने जाने वाले मतदाताओं की पहचान करने और उनके नाम मतदाता सूची से काटने के लिए त्वरित रूप से कदम उठाए।
शीर्ष न्यायालय ने मार्च में केंद्र से कहा था कि वह सीमा पार से असम में होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए भारत और बांग्लादेश की सीमा पर बाड़ बांधने के लिए धन जारी करे। न्यायालय ने कहा था कि यह काम जल्दी पूरा हो जाना चाहिए।
न्यायालय ने अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित बनाने और उसपर बाड़ लगाने से जुड़े काम में हुई प्रगति पर केंद्र की स्थिति रिपोर्ट पर गौर करने के बाद यह आदेश पारित किया था। न्यायालय ने कहा था कि मधुकर गुप्ता समिति इसका निरीक्षण और पर्यवेक्षण करेगी