
चोर का दुश्मन चांद-
बुरे काम हमेशा रात के अंधेरे में किए जाते हैं और ऐसे लोगों को अपने कर्मों के बीच रोशनी जरा भी रास नहीं आती। कहने का तात्पर्य यह है कि चोरों को चांद की रोशनी और चांद अपने शत्रु जैसे दिखाई देते हैं, क्योंकि चांद की रौशनी भी इतनी काफी होती है कि किसी भी चोर का चेहरा पहचाना जा सके। चोर लोग चांदनी रात में आसानी से चेारी नहीं कर पाते इसलिए वे चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं।
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