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क्या है 3,200 करोड़ रुपये का आंध्र प्रदेश शराब घोटाला? किन लोगों पर लगा है आरोप, 12 बक्सों में मिले 11 करोड़ रुपये

 Reported By: Surekha Abburi Edited By: Subhash Kumar
 Published : Jul 30, 2025 12:00 pm IST,  Updated : Jul 30, 2025 02:37 pm IST

आंध्र प्रदेश सीआईडी के अधिकारियों ने एक फार्म हाउस में किए गए रेड में 12 बक्सों में 11 करोड़ रुपये जब्त किए हैं। इस रकम के आंध्र प्रदेश में शराब घोटाले से संबंधित होने की बात कही जा रही है।

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आंध्र प्रदेश शराब घोटाला। Image Source : INDIA TV/FREEPIK

हैदराबाद से सटे रंगारेड्डी जिले के शमशाबाद मंडल के काचाराम में स्थित सुलोचना फार्म हाउस में आंध्र प्रदेश सीआईडी के अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की है। 12 बक्सों में लगभग 11 करोड़ रुपये होने की खबर मिली है। जब्त की गई नकदी आंध्र प्रदेश में शराब घोटाले से संबंधित होने की बात कही जा रही है। सीआईडी अधिकारियों ने आधी रात को फार्महाउस पर पहुंचकर 12 बक्सों में रखे 11 करोड़ रुपये जब्त किए। स्थानीय पुलिस को सूचित करने के बाद, आंध्र प्रदेश सीआईडी अधिकारियों द्वारा नकदी को आंध्र प्रदेश राज्य में ले जाया गया। आइए जानते हैं कि क्या है ये शराब घोटाला और इसके बारे में अब तक क्या कुछ पता लगा है।

क्या है ये शराब घोटाला?

मामले की जांच कर रहे एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के अनुसार, आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) सरकार के कार्यकाल में कथित तौर पर 3,200 करोड़ रुपये का एक बड़ा शराब घोटाला हुआ था। पुलिस ने इस घोटाले का आरोप तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के पूर्व आईटी सलाहकार केसी रेड्डी राज शेखर रेड्डी पर लगाया है। एसआईटी ने राज को 21 अप्रैल को हैदराबाद हवाई अड्डे पर गिरफ़्तार किया था। राज शेखर और उनके सहयोगियों, जिनमें वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेता और नौकरशाह शामिल हैं, पर राज्य की शराब नीति का दुरुपयोग करके लोकप्रिय शराब ब्रांडों की जगह कम प्रसिद्ध ब्रांडों को शामिल करने का आरोप है, जिसके बदले में उन्हें 3,200 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली। हर महीने 50 से 60 करोड़ रुपये की रिश्वत प्राप्त करने की विस्तृत योजना के साथ, राज शेखर और अन्य साथियों ने यह सुनिश्चित किया कि उन कंपनियों को नियमित रूप से ऑर्डर दिए जाएं जिनसे पहले से तय रिश्वत प्राप्त होती थी।

और किन लोगों का नाम सामने आया?

राज शेखर इस मामले में सामने आने वाला एकमात्र बड़ा नाम नहीं है। राज की रिमांड रिपोर्ट में जिसपर राजशेखर रेड्डी ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया, पूर्व राज्यसभा सांसद वाई विजयसाई रेड्डी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। जो पहले जगन के करीबी सहयोगी थे, जिन्होंने जनवरी में अपनी संसद सदस्यता और राजनीति भी छोड़ दी थी। एक और बड़ा नाम राजमपेट से वाईएसआरसीपी सांसद पीवी मिधुन रेड्डी का है, जो आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री पेड्डीरेड्डी रामचंद्र रेड्डी के बेटे हैं जिन्हें इस मामले में गिरफ़्तार किया गया है । जगन मोहन रेड्डी को आरोपी के रूप में तो नहीं लेकिन उनका प्रस्ताव हाल ही में दायर की गई चार्ज शीट में है।

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Image Source : REPORTERरेड में पकड़ी गई रकम।

क्या थी नई शराब नीति?

2019 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान, जगन ने राज्य में चरणबद्ध तरीके से शराबबंदी लागू करने का वादा किया था। सत्ता में आने के तुरंत बाद, अक्टूबर 2019 में, वाईएसआरसीपी एक नई शराब नीति लेकर आई, जिसके बारे में उनका दावा था कि यह इस वादे के अनुरूप है। सरकार ने राज्य की लगभग 3,500 शराब की दुकानों को अपने नियंत्रण में लेने का फैसला किया। शराब की खपत को कम करने के लिए दुकानों के खुलने का समय कम कर दिया गया और कीमतें बढ़ा दी गईं। शराब का कारोबार पूरी तरह से सरकारी स्वामित्व वाली आंध्र प्रदेश राज्य पेय पदार्थ निगम लिमिटेड (एपीएसबीसीएल) को सौंप दिया गया। सरकार ने शराब की तस्करी और अवैध शराब बनाने पर अंकुश लगाने के लिए निषेध एवं आबकारी विभाग के अंतर्गत एक विशेष प्रवर्तन ब्यूरो (एसईबी) की भी स्थापना की। समय के साथ, लोकप्रिय ब्रांड धीरे-धीरे शराब की दुकानों से गायब हो गए और उनकी जगह नए, अनजान ब्रांड आ गए। बूम और प्रेसिडेंट मेडल जैसे नामों वाले शराब के ब्रांड अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चा में रहते थे, लोग या तो इस बात पर मज़ाक उड़ाते थे या फिर इस बात पर असंतोष जताते थे कि राज्य में सिर्फ़ ऐसे अनजान ब्रांड ही उपलब्ध हैं।

शराब की तस्करी के बड़े पैमाने पर प्रयास

कीमतों में तेज वृद्धि के कारण पड़ोसी राज्यों कर्नाटक और तेलंगाना से शराब की तस्करी के बड़े पैमाने पर प्रयास किए गए, जिसके कारण सरकार को 2021 में कीमतों में कटौती करनी पड़ी। और अब आंध्र प्रदेश शराब घोटाले से जुड़ी एक बड़ी छापेमारी में, एसआईटी अधिकारियों ने हैदराबाद के पास एक गेस्टहाउस से 11 करोड़ रुपये नकद ज़ब्त किए। यह छापेमारी आरोपी वरुण पुरुषोत्तम के इकबालिया बयान के बाद हुई है।

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