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"प्यार ढिंढोरा पीटने से नहीं होता", ‘I love Mohammad’ विवाद पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Sep 26, 2025 05:24 pm IST,  Updated : Sep 26, 2025 05:59 pm IST

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने आई लव मोहम्मद विवाद पर कहा कि प्यार निगाहों से होता है, जुबान से नहीं।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती- India TV Hindi
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। फाइल Image Source : PTI

रोहतासः आई लव मोहम्मद विवाद पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बड़ा बयान सामने आया है। जगद्गुरु ने कहा कि "प्यार ढिंढोरा पीटने से नहीं होता"। ‘I love Mohammad’ से जुड़े सवाल पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्यार निगाहों से होता है, जुबान से नहीं"। 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 'आई लव मोहम्मद' विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सच्चे प्यार को ढिंढोरा पीटने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि हम कभी भी सच्चे प्रेम को इस तरह के प्रदर्शन में नहीं देखते।

वास्तविक प्रेम ढिंढोरा पीटने का मोहताज नहीं होता

शायराना अंदाज में उन्होंने कहा, "कौन कहता है कि मोहब्बत की जुबान होती है, ये हकीकत तो निगाहों से बयां होती है।" उन्होंने आगे कहा, "इश्क मुश्क, खांसी, खुशी, बैर, प्रीति, मदपान – दाबे से यह ना दबे जानत सकल जहान।" स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि यह ट्रेंड केवल दिखावा है और वास्तविक प्रेम ढिंढोरा पीटने का मोहताज नहीं होता।

कई राज्यों में प्रदर्शन

बता दें कि उत्तर प्रदेश के कानपुर से शुरू हुए 'आई लव मुहम्मद' विवाद ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय के विरोध प्रदर्शनों और जुलूसों को जन्म दिया है। उन्नाव, बरेली, कौशांबी, लखनऊ, महाराजगंज, काशीपुर और हैदराबाद जैसे शहरों में रैलियां और सड़क पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें से कुछ में पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं। 

क्या है 'आई लव मुहम्मद' विवाद

यह विवाद 4 सितंबर को कानपुर के रावतपुर में बारावफात (ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) के जुलूस के दौरान शुरू हुआ। एक समूह ने जुलूस के रास्ते में 'आई लव मुहम्मद' का बैनर लगा दिया। इस पर स्थानीय हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई, जिन्होंने दावा किया कि बारावफात समारोहों के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली जगह पर एक "नई परंपरा" शुरू की जा रही है। 9 सितंबर को, कानपुर पुलिस ने बारावफ़ात के जुलूस के दौरान एक नई परंपरा शुरू करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में 24 लोगों (9 नामजद, 15 अज्ञात) के खिलाफ मामला दर्ज किया। मामले में पारंपरिक तंबू हटाकर नए स्थान पर बैनर लगाने का आरोप लगाया गया है।

 

 रिपोर्ट- रंजन सिंह, रोहतास

 

 

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