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फ्रांस में मिला कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ‘IHU’, ओमिक्रॉन से भी ज्यादा संक्रामक

 Reported By: Bhasha
 Published : Jan 04, 2022 05:34 pm IST,  Updated : Jan 04, 2022 05:34 pm IST

एपिडेमियोलॉजिस्ट एरिक फीगल-डिंग ने एक लंबा ट्विटर थ्रेड पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा कि नए वेरिएंट सामने आते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे अधिक खतरनाक होंगे।

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वैज्ञानिकों ने दक्षिणी फ्रांस में कोविड-19 के एक नए वेरिएंट की पहचान की है जिसे उन्होंने 'आईएचयू' नाम दिया है। Image Source : AP REPRESENTATIONAL

Highlights

  • वैज्ञानिकों ने दक्षिणी फ्रांस में कोविड-19 के एक नए वेरिएंट की पहचान की है जिसे 'आईएचयू' नाम दिया गया है।
  • वायरस के बी.1.640.2 वर्जन को ‘आईएचयू मेडिटेरेनी इंफेक्शन’ के रिसर्चर्स ने कम से कम 12 मामलों में पाया है।
  • रिसर्चर्स का कहना है कि संक्रमण और टीकों से सुरक्षा को लेकर अभी अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।

नयी दिल्ली: एक ऐसे वक्त में जब दुनिया कोरोना वायरस के बेहद संक्राणक वेरिएंट ओमिक्रॉन से जूझ रही है, फ्रांस से एक बुरी खबर आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने दक्षिणी फ्रांस में कोविड-19 के एक नए वेरिएंट की पहचान की है। इस वेरिएंट को वैज्ञानिकों ने 'आईएचयू' नाम दिया है। वायरस के बी.1.640.2 वर्जन को ‘आईएचयू मेडिटेरेनी इंफेक्शन’ के रिसर्चर्स ने कम से कम 12 मामलों में पाया है। इसे अफ्रीकी देश कैमरून की यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, रिसर्चर्स का कहना है कि जहां तक संक्रमण और टीकों से सुरक्षा का संबंध है, तो इस बारे में अभी अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।

नए वेरिएंट में हैं 46 म्यूटेशन

स्वास्थ्य विज्ञान के बारे में अप्रकाशित पांडुलिपियों को प्रकाशित करने वाली इंटरनेट साइट मेडआर्काइव पर 29 दिसंबर को पोस्ट किए गए अध्ययन से पता चला है कि IHU में 46 म्यूटेशन और 37 विलोपन हैं, जिसके परिणामस्वरूप 30 अमीनो एसिड प्रतिस्थापन और 12 विलोपन होते हैं। अमीनो एसिड ऐसे अणु होते हैं, जो प्रोटीन बनाने के लिए गठबंधन करते हैं और दोनों जीवन के निर्माण खंड हैं। वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश टीके सार्स-कोव-2 के स्पाइक प्रोटीन पर लक्षित होते हैं। ये वायरस कोशिकाओं में प्रवेश करने और संक्रमण के लिए इन्हीं प्रोटीन को निशाना बनाते हैं।

‘एक नए संस्करण की ओर इशारा’
एन501वाई और ई484के म्यूटेशन पहले बीटा, गामा, थीटा और ओमिक्रॉन वेरिएंट में भी पाए गए थे। स्टडी के लेखकों ने कहा है, ‘यहां प्राप्त जीनोम के उत्परिवर्तन सेट और फाइलोजेनेटिक स्थिति हमारी पिछली परिभाषा के आधार पर आईएचयू नामक एक नए संस्करण की ओर इंगित करती है।’ बी.1.640.2 को अब तक अन्य देशों में पहचाना नहीं गया है या विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जांच के तहत किसी प्रकार का लेबल नहीं लगाया गया है।

‘जरूरी नहीं कि नया वेरिएंट ज्यादा खतरनाक’
एपिडेमियोलॉजिस्ट एरिक फीगल-डिंग ने एक लंबा ट्विटर थ्रेड पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा कि नए वेरिएंट सामने आते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे अधिक खतरनाक होंगे। फीगल-डिंग ने मंगलवार को ट्वीट किया, ‘जो चीज किसी वैरिएंट को अधिक खतरनाक बनाती है, वह है मूल वायरस की तुलना में वह कितना गुना उत्परिवर्तन होती है।’

ओमिक्रॉन की उछाल से त्रस्त हैं कई देश
कई देश फिलहाल कोरोना ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले में आए उछाल से त्रस्त हैं। इस वेरिएंट की पहचान दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना में पिछले वर्ष नवम्बर में की गयी थी। उसके बाद से ओमिक्रॉन 100 देशों में फैल चुका है। भारत में अब तक 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ओमिक्रॉन वेरिएंट के संक्रमण के कुल 1892 मामले सामने आए हैं।

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