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Rajat Sharma's Blog | JNU : संविधान, अदालत को टुकड़े-टुकड़े गैंग की चुनौती

Written By: Rajat Sharma @RajatSharmaLive Published : Jan 07, 2026 03:47 pm IST, Updated : Jan 07, 2026 03:47 pm IST

JNU में जो हुआ वो अर्बन नक्सलों का सोचा-समझा हमला है। ये लोग बड़े चालाक हैं। इंकलाब का नारा लगाते हैं, मोदी और RSS का नाम लेकर शोर मचाते हैं लेकिन जिस फैसले को ये चुनौती दे रहे हैं वो फैसला सुप्रीम कोर्ट का है। JNU में लगे ये नारे हमारे संविधान और सुप्रीम कोर्ट को चुनौती है।

Rajat sharma Indiatv- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

दिल्ली में जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) की ज़मीन से एक बार फिर देश के खिलाफ आवाज उठाई गई । JNU को एक बार फिर बदनाम किया गया। जिस JNU में दस साल पहले ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्लाह... इंशा अल्लाह’ के नारे लगे थे, उसी कैंपस में ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी, अमित शाह तेरी कब्र खुदेगी’ जैसे नारे लगाए गए।

नारे लगाने वाले उन्हीं संगठनों से जुड़े हैं, जिन्होंने 'देश के टुकड़े होंगे' जैसे नारे लगाए थे। JNU में लेफ्ट फ्रंट के छात्र नेताओं ने JNU छात्र संघ की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव ने अपने समर्थकों के साथ जमकर नारेबाजी की। 

इनकी नाराजगी की वजह ये थी कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत की अर्ज़ी खारिज कर दी थी। फैसला सुप्रीम कोर्ट का था लेकिन गुस्सा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर उतारा गया। मोदी और अमित शाह की मौत की कामना की गई, क्या विरोध करने का ये तरीका ठीक है? क्या विचारधारा के विरोध का मतलब संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की मौत की कामना करना है? क्या छात्र नेता अपनी हदें पार कर रहे हैं? क्या JNU अब अर्बन नक्सल्स का अड्डा बन गया है? 

JNU प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिख कर इन छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज़ करने के लिए कहा है। सोमवार की रात JNU के साबरमती हॉस्टल के बाहर AISA और SFI के छात्र नेताओं की एक बैठक बुलाई गई, इसे नाम दिया गया गुरिल्ला ढाबा। बताया गया कि छात्र संगठनों के लोग साबरमती हॉस्टल के बाहर 2020 में JNU में छात्रों पर हुए हमलों के विरोध में प्रोटेस्ट करेंगे क्योंकि उस मामले में अभी तक कोई एक्शन नहीं हुआ लेकिन जब भीड़ जुटी तो समझ आया कि विरोध प्रदर्शन उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत अर्जी खारिज होने के खिलाफ थी। 

नारेबाज़ी तक ठीक था लेकिन थोड़ी ही देर के बाद ‘मोदी तेरी क़ब्र खुदेगी, अमित शाह तेरी क़ब्र खुदेगी, JNU की धरती पर खुदेगी’, जैसे नारे लगाने शुरू कर दिए। फिर RSS, BJP, अंबानी, अडानी के ख़िलाफ़ नारे लगने लगे, भगवा को शिकस्त देने के दावे किए गए।

साबरमती हॉस्टल के बाहर जो गुरिल्ला ढाबा प्रोटेस्ट हुआ, उसमें जिस तरह के देश को शर्मसार करने वाले नारे लगे, इसी तरह के नारे इसी JNU में इसी जगह पर दस साल पहले भी लगे थे। तब भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की कामना की गई थी।

JNU प्रशासन ने कहा है कि विरोध के नाम पर विश्वविद्यालय की आचार संहिता को तोड़ा गया, लोकतांत्रिक आज़ादी के नाम पर संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ अपमानजनक नारेबाज़ी की गई, इससे कैंपस का माहौल बिगड़ सकता है।

BJP के नेताओं ने इस तरह की नारेबाजी पर नाराज़गी जाहिर की। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि JNU टुकड़े-टुकड़े गैंग का हेड-ऑफिस बन गया है,  इस तरह के नारे लगाने वालों के खिलाफ देशद्रोह का मुक़दमा चलना चाहिए।

JNU में जो हुआ, उसने एक बार फिर देशभक्तों को ललकारा है। सवाल सिर्फ मोदी और अमित शाह के खिलाफ नारे लगाने का नहीं है। किसी भी व्यक्ति की मौत की कामना करना इंसानियत के खिलाफ अपराध है लेकिन मोदी तो बहाना हैं, देश निशाना है।

JNU में जो हुआ वो अर्बन नक्सलों का सोचा-समझा हमला है। ये लोग बड़े चालाक हैं। इंकलाब का नारा लगाते हैं, मोदी और RSS का नाम लेकर शोर मचाते हैं लेकिन जिस फैसले को ये चुनौती दे रहे हैं वो फैसला सुप्रीम कोर्ट का है। JNU में लगे ये नारे हमारे संविधान और सुप्रीम कोर्ट को चुनौती है। इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 06 जनवरी 2026 का पूरा एपिसोड

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