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संसद में उठा घरेलू हिंसा-शोषण के कानून के दुरुपयोग का मामला, सांसद बोले- सख्त कार्रवाई हो

 Published : Feb 03, 2025 06:06 pm IST,  Updated : Feb 03, 2025 09:03 pm IST

शुक्रवार को संसद में घरेलू हिंसा-शोषण के कानून के दुरुपयोग का मामला उठा। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा।- India TV Hindi
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा। Image Source : SOCIAL MEDIA

देश में बीते कुछ समय से महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा और शोषण से जुड़े कानून के दुरुपयोग को लेकर काफी हंगामा मचा हुआ है। अब ये मुद्दा संसद में उठ गया है। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने 'अतुल सुभाष' की आत्महत्या का जिक्र करते हुए इन मामलों पर चिंता जाहिर की है। सांसद दिनेश शर्मा ने सदन में झूठे आरोप झेलने वाले पुरुषों के लिए जरूरी कानूनी और भावात्मक समर्थन की मांग उठायी है। उन्होंने झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कानून को जेंडर न्यूट्रल बनाने की मांग 

शुक्रवार को राज्यसभा में सांसद दिनेश शर्मा ने शून्यकाल के तहत अतुल सुभाष की आत्महत्या का जिक्र किया। उन्होंने इस दौरान घरेलू हिंसा तथा उत्पीड़न से जुड़े कानून को जेंडर न्यूट्रल बनाने की मांग की है। सांसद ने कहा कि कानून ने महिलाओं को घरेलू हिंसा और शोषण से बचाने में बहुत प्रगति की है लेकिन ऐसी ही हिंसा और शोषण से पुरुषों के लिए सुरक्षा का अभाव चिंता की बात है। सांसद ने कहा कि झूठे आरोपों का सामना करने वाले पुरुषों के लिए पर्याप्त कानूनी और भावात्मक समर्थन नहीं है। उन्होंने कहा कि BNS की धारा 85 का दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय है।

झूठे आरोप लगाने वालों पर कार्रवाई की मांग

राज्यसभा में भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा- "मैं अनुरोध करता हूं कि घरेलू हिंसा और उत्पीड़न से जुड़े कानून को जेंडर न्यूट्रल बनाया जाए ताकि सभी के साथ न्याय हो सके। अगर सिस्टम की कमी के कारण एक भी व्यक्ति अपनी जान दे देता है तो यह हमारे लिए आत्ममंथन का समय है। झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि न्याय प्रणाली की निष्पक्षता और सच्चाई को बरकरार रखा जा सके।"

आत्महत्या के अहम आंकड़े आए सामने

दिनेश शर्मा ने शुक्रवार को राज्यसभा में NCRB के जरूरी आंकड़े भी सामने रखे। उन्होंने बताया कि साल 2022 में भारत में आत्महत्या करने वाले लोगों में 72 प्रतिशत यानी कुल 1,25,000 पुरुष थे जबकि महिलाओं की संख्या लगभग 47,000 थी। साल 2014 से 2021 के बीच पुरुष और महिलाओं के आत्महत्या के अनुपात में काफी वृद्धि हुई है। इस दौरान 107.5 फीसदी ज्यादा पुरुषों ने आत्महत्या की वजह पारिवारिक समस्याओं को बताया था। (इनपुट: भाषा)

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