Saturday, February 28, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. सुप्रीम कोर्ट ने आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापनों पर IMA की याचिका बंद की, अंतरिम रोक हटाई

सुप्रीम कोर्ट ने आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापनों पर IMA की याचिका बंद की, अंतरिम रोक हटाई

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Aug 12, 2025 07:16 pm IST, Updated : Aug 12, 2025 07:16 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने IMA की आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापनों पर दायर याचिका बंद कर दी और नियम 170 पर अंतरिम रोक हटा दी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में मांगी गई राहत पहले ही मिल चुकी है। अब पक्षकार हाई कोर्ट में जा सकते हैं।

Supreme Court, IMA- India TV Hindi
Image Source : PTI REPRESENTATIONAL सुप्रीम कोर्ट ने IMA की याचिका बंद कर दी।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की उस याचिका को बंद कर दिया, जिसमें आयुर्वेद और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में मांगी गई राहत पहले ही मिल चुकी है, इसलिए अब इस मामले को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही, कोर्ट ने नियम 170 को हटाने पर लगाई गई अंतरिम रोक को भी हटा दिया और पक्षकारों को हाई कोर्ट में जाने की छूट दी।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई शुरू करते हुए कहा, 'याचिका में मांगी गई सारी राहत पहले ही पूरी हो चुकी है। अब इस मामले को बंद करना चाहिए।' IMA की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि आयुर्वेद के विज्ञापनों में कई बार गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर के इलाज का दावा किया जाता है, जिससे मरीज भटक जाते हैं और जब तक वे एलोपैथी डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, तब तक बीमारी गंभीर हो चुकी होती है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'जब तक इन दवाओं को बनाने की इजाजत है, हम यह नहीं कह सकते कि इन्हें बेचा न जाए।' जस्टिस विश्वनाथन ने यह भी कहा कि विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाना अनुचित व्यापार व्यवहार हो सकता है।

'आम आदमी की समझ को कम न आंके'

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ऐसी शिकायतों के लिए कानूनी व्यवस्था मौजूद है। एक वकील ने देश की बड़ी अनपढ़ आबादी का हवाला देते हुए चिंता जताई, जिस पर मेहता ने टिप्पणी की, 'यह जंतर-मंतर नहीं है, जहां कोई भी आकर कुछ भी कह दे। आम आदमी की समझ को कम न आंके।' वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि वे सिर्फ एक मंच हैं और फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म को बेवजह मुकदमों में नहीं घसीटा जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियम 170 को हटाने से जुड़े किसी भी मुद्दे पर पक्षकार हाई कोर्ट जा सकते हैं।

क्या था नियम 170? इस मामले में पहले क्या हुआ?

नियम 170, ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 का हिस्सा था, जो भ्रामक विज्ञापनों को नियंत्रित करता था। आयुष मंत्रालय ने 1 जुलाई 2024 को इस नियम को हटा दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 27 अगस्त 2024 को इस पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अब कोर्ट ने इस रोक को हटा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पहले भी कई कड़े कदम उठाए थे। फरवरी 2024 में, कोर्ट ने झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी और पंजाब से नियम 170 के पालन की स्थिति पर जवाब मांगा था।

कोर्ट ने झारखंड से सवाल किया था कि क्या उनके यहां नियम 170(2) का उल्लंघन करने वाले विज्ञापन प्रकाशित हो रहे हैं। कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी थी कि नियमों का पालन न करने पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। 10 फरवरी को, कोर्ट ने आंध्र प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर से गैर-अनुपालन पर जवाब मांगा था। 15 जनवरी को, कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिए थे।

पतंजलि और IMA के बीच था विवाद

इस मामले में पतंजलि आयुर्वेद और IMA के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। अगस्त 2024 में, सुप्रीम कोर्ट ने IMA के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. आर.वी. अशोकन के खिलाफ अवमानना नोटिस पर सुनवाई की थी। उनकी टिप्पणियों के लिए कोर्ट ने उनसे माफी मांगने को कहा था, लेकिन मई में कोर्ट ने उनकी माफी को स्वीकार नहीं किया था। हालांकि, बाद में अगस्त 2024 में, बाबा रामदेव और पतंजलि के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण की बिना शर्त माफी को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी।

विज्ञापन उद्योग के लिए नया नियम

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 4 जून 2024 को एक नया पोर्टल शुरू किया, जहां विज्ञापनदाताओं को टीवी, रेडियो, प्रिंट और डिजिटल विज्ञापनों के लिए 'स्व-घोषणा प्रमाणपत्र' जमा करना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले में और विचार की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने सभी पक्षों को हाई कोर्ट में जाने की आजादी दी और अंतरिम रोक को हटा दिया। यह फैसला आयुर्वेद और एलोपैथी के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Latest India News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत

Advertisement
Advertisement
Advertisement